Saturday, June 13, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

एक हाहाकारी सत्य कथा : गब्बर वर्सेज नेहरू …

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 26, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
एक हाहाकारी सत्य कथा : गब्बर वर्सेज नेहरू ...
एक हाहाकारी सत्य कथा : गब्बर वर्सेज नेहरू …

माननीय श्री गब्बर सिंह 1926 में पैदा हुए थे. मामाजी के मध्यप्रदेश में भिंड की पावन धरती पर उनका बचपन बीता. यह सूखा इलाका है, तो आसपास न कोई तालाब था, न मगरमच्छ !

लेकिन कुछ दूर चंबल नदी थी, वहां के मगरमच्छ प्रसिद्ध है. तो महज 20 साल की उम्र में माननीय गब्बर जी ने अपना घर छोड़ दिया और मां चंबल के मगरमच्छों की सेवा में जीवन अर्पण करने का निर्णय किया.

You might also like

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

मां चंबल की सेवा में वहां पहले से एक दल मौजूद था, जिसका नेतृत्व श्री कल्याण सिंह जी कर रहे थे. ये वो वाले कल्याण सिंह नहीं है, चंबल में 60 के दशक वाले डाकू की बात हो रही है. गब्बर जी ने उस दल की सदस्यता ग्रहण की.

शीघ्र ही उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन करते हुए अपना स्वयं का दल बना लिया. 1956 में उनके द्वारा कुछ दुष्टों का संहार किया गया, जिससे वे चर्चा में आ गए. 1957 में उन्होंने कुछ गांवों में आग लगाई, कुछ वध औऱ किये जिससे उनका नाम 50 कोस दूर तक फैल गया.

माताएं अपने बच्चों को गब्बर का नाम लेकर सुलाने लगी. बच्चे गब्बर काकू का नाम सुनते ही सो जाते, परन्तु इससे आसपास के थाने वालों की नींद हराम हो गयी. उन्होंने गब्बर को पकड़ने के लिए इनाम रखा. फिगर तो आप जानते ही हैं…पूरे पचास हजार…!

गब्बर साहब का फ़िल्म शोले में काफी बुरा चित्रण किया गया है. वह अविवाहित थे, न लोग न लइका, तो करप्शन भी नहीं करते थे. बीहड़ों में कठिन जीवन जीते, कठोर परिश्रम करते.

गब्बर सिंह टैक्स से जो थोड़ा बहुत लूट लाटकर मिल जाता, उसी में थोड़ा मशरूम खाकर और वाइन पी के गुजारा कर लेते. कुछ बचत करके हफ्ते दो हफ्ते में हजार-पांच सौ सूट भी सिला लेते. उन सूटों के रेशे-रेशे में लिखा होता –

ग
ब्ब
र
दा
मो
द
र
दा
स
सिं
ह

न मठ था, न सात सितारा ऑफिस, न एसी औऱ न स्कूटर में छिपाए बम. वन में रहते और कुछ दुनाली तथा धारदार हथियारों के बूते वे अपनी रक्षा करते. दिन रात बस एक ही ख्याल रहता, कैसे चंबल मैया की सेवा की जाये !

कैसे अपने दल के लोगों का जीवन आसान किया जाए. कला और खैनी के प्रेमी थे, इसलिए समय-समय पर हेलनस्मृति नृत्य समारोह का आयोजन होता.

ऐसे परम् त्यागी महात्मा, देवता स्वरूप इंसान के पीछे खुर्रम फरामूर्ज़ रूस्तम पड़ गया. उसे वर्दी से नहीं, नाम से पहचानिए. नेहरू इसके जिम्मेदार थे. सीरियसली जिम्मेदार थे भाई !

के. एफ. रुस्तमजी, वो प्रसिद्ध आईपीएस थे, जो लंबे समय तक नेहरू के सुरक्षा प्रमुख थे. फिर एक दिन गार्ड ड्यूटी से ऊबकर फील्ड पोस्टिंग मांग ली तो उन्हें मध्यप्रदेश का आईजी बना दिया गया.

तब आईजी, याने डीजीपी…पुलिस प्रमुख. मध्यप्रदेश का पुलिस प्रमुख बनते ही उन्होंने डकैतों पर लगाम लगानी शुरू की. 13 नवम्बर 1959 की रात में भिंड जिले के एक गांव में डकैत गब्बर सिंह गुर्जर की पुलिस से मुठभेड़ हुई और वे अल्लाह को प्यारे हो गए !

खबर को रूस्तम साहब ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को उनके जन्मदिन की बधाई भेंट के रूप में पेश किया.

तो हुए न नेहरू जिम्मेदार. एक वो दिन है, और आज का दिन. 30 स्टेट औऱ 7 केंद्रशासित प्रदेश में जब कहीं कोई यशस्वी गब्बर भाषण देता है, तो जनता कहती है- बेटा, चुप हो जा…वरना नेहरू आ जायेगा !

नोट – कहानी पूर्णतया सत्य है और जीवित और मृत व्यक्तियों से इसका संबंध होने की पूर्ण संभावना है. जिन्हें डाउट हो, गूगल पर गब्बर सिंह गुर्जर खोजकर विवरण सत्यापित कर सकते हैं.

  • मनीष सिंह

Read Also –

नवजीवन (हेरल्ड ग्रुप) : नेहरू और उनकी संस्था को जनता पार्टी की सरकार बाहर से और जनसंघ अंदर से हमला कर रही थी
नेहरू के भारत में राजनीति के अपराधीकरण पर सिंगापुर की संसद में चर्चा 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

आशीष विद्यार्थी ने शादी किया है…, बलात्कार थोड़ी न किया है

Next Post

धर्मांतरण : एक देश दो कानून…, ऐसा क्यों…?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
Next Post

धर्मांतरण : एक देश दो कानून..., ऐसा क्यों...?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

Adam’s Event : जिसने 42 हजार साल पहले नियंडरथल का सम्पूर्ण विनाश और इंसानों को बुद्धिमान बना दिया

July 31, 2024

इवीएम की धांंधली से भाजपा को वोट

November 3, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

June 10, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.