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ताजमहल : काल के गाल पर रूका हुआ आंसू….

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 1, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
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ताजमहल : काल के गाल पर रूका हुआ आंसू....
ताजमहल : काल के गाल पर रूका हुआ आंसू….

‘काल के गाल पर ठहरा हुआ आंसू…’, ताजमहल को देखकर रविन्द्रनाथ टैगोर ने यही कहा था। लेकिन ताजमहल, मुगलिया तवारीख के गले का हार है, एक चमकता मोती है. और जब ताजमहल की बात होती है, तो शाहेजहां की भी होती है.

शाहजहां का दौर अदभुत निर्माण के लिए जाना जाता है. जिस लाल किले पर चढ़कर हिंदुस्तान के वजीरेआजम तकरीर करते है, वो लालकिला शाहेजहां ने बनवाया.

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उसके पास ही लाल सफेद पत्थरों से निर्मित खूबसूरत जामा मस्जिद है, वह भी शाहजहां ने बनवाई. पाकिस्तान में पड़ने वाले थट्टा में एक शानदार मस्जिद की तामीर शाहजहां के खाते में हैं.

आगरे के भीतर मोती मस्जिद और दूसरे कुछ खूबसूरत मैजेस्टिक हिस्से भी शाहजहां के नाम है. इसके अलावे छोटे मोटे निर्माण अनगिनत हैं.

मगर ताजमहल, ताजमहल है. ये स्वर्ग के इस्लामी वर्णन की तामीर है. जन्नत में जिस तरह के बाग होते है, नहर-ए-बहिश्त होती है, खुदा का घर होता है, बस उस वास्तु विवरण के मुताबिक यह भवन बना.

इसमें सफेद मकराना का टनों संगमरमर लगा है. दीवारों पर जो आयतें और फूलों, लाताओं की जो पेंटिग आप देखते हैं, असल में जेम स्टोन्स की पच्चीकारी है. शानदार सिमिट्री है, और इसका डिजाइन कई आप्टिकल इल्यूजन को शह देता है.

दूसरे मायनों में शाहजहां का दौर कुछ खास नहीं था. उसका नाम इतिहास में अमर हुआ तो ताजमहल के बूते. और इसके निर्माण में जो खर्च किया गया, उसकी कीमत आज 850 मिलियन डॉलर आंकी जाती है.

हजारों शिल्पियों ने बरसों तक जीवन लगाकर इस शाहकार को रचा. और फिर शाहजहां ने उन्हें इफरात रकम देकर राजी कर लिया कि वे दुनिया में ऐसी दूसरी इमारत नहीं बनाऐंगे. हाथ काट देने का लेजेंड इसी बात का विरूपण है.

तो दुनिया में दूसरा ताजमहल बनना मुमकिन न था. हालांकि इस बात के प्रमाण है कि शाहेजहां नदी के दूसरी ओर एक काला ताजमहल भी बनवाना चाहता था.

वो हिंदुस्तान का बादशाह था, रोकने वाला कौन था, जरूर बनवा लेता. लेकिन उसकी औलाद ने देखा कि बाप राजकोष को अंधाधुंध महंगे निर्माण में लुटा रहा है, तो उसे पकड़कर कैद कर लिया. और फिर काला ताजमहल न बन सका.

इसलिए शाहजहां के नाम को अमर करने के लिए बना ताजमहल अद्वितीय है. सारी दुनिया से आए लोग इस मोहब्बत की निशानी को निहारते हैं. जब वे इसके शफ्फाक सादे सौन्दर्य को देख आहें भरते हैं, तो भूल जाते हैं कि उनके कदमों के नीचे…मुमताज की गली हुई लाश गड़ी है.

हाल में शाहजहां ने 1200 करोड रूपये लगाकर लोकतंत्र का ताजमहल बनाया है. इसमें शानदार झूमर है, पत्थर की जालियां हैं, फैंसी सीलिंग है, टाइल्स हैं, टॉयलेट हैं, ऑफिस हैं.

तमाम अत्याधुनिक स्टेट ऑफ द आर्ट फैसलिटीज है तो एक बटन मात्र दबाने से सारा साउंड सिस्टम बंद करने और वॉइस कमाण्ड से सदन की कार्यवाही का प्रसारण रोकने की सुविधा भी स्पीकर के पास होगी.

तमाम मीडिया, देश और समाज लोकतंत्र के इस नए मंदिर की भव्यता, सौन्दर्य और कला पर मोहित है. वो इस भवन को मेस्मराइज होकर अपलक निहार रहा है. यह रियलाइज किये बगैर कि उस भवन के नीचे…लोकतंत्र की ताजी लाश गड़ी है.

  • मनीष सिंह

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