Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

‘कौन जात हो भाई ?’ दलित स्वाभिमान को मिट्टी में मिलाती एक कविता

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 17, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
विनोद शंकर

‘बच्चा लाल उन्मेष’ की बहुचर्चित कविता ‘कौन जात हो भाई ?’ आप सब ने पढ़ा ही होगा. आइये आज इस कविता पर बात करते हैं. देखने में ये कविता अच्छी है, जिसमें दलितों के दुरदसा और दयनीय स्थिति का मार्मिक वर्णन है, जिसे पढ़कर पाठक के अंदर दलितों के प्रति दया आती है. इस कविता में दलित बहुत ही हीन भावना से ग्रस्त है, जो सवर्ण जातियों के दया और खैरात पर जी रहा है.

अगर यह कविता बाबा साहेब डॉ. आम्बेडकर या ज्योतिबा फूले से पहले लिखी गई होती तो शायद इस पर कोई आपत्ति नहीं होती. लेकिन ये कविता 21 वीं सदी में लिखी गई है, जब दलितों ने अपने आंदोलनों द्वारा बहुत कुछ हासिल कर लिया है. जिसमें सबसे बड़ी चीज है स्वाभिमान. और यह कविता इसी दलित स्वाभिमान को मिट्टी में मिला देती है.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

यह कविता सवाल-जवाब के शैली में लिखी गई है. कविता इस प्रश्न के साथ शुरू होती है, ‘कौन जात हो भाई ?’ इसके उत्तर में कवि कहता है, ‘दलित हूं साब !’ यहीं पर इस कविता के साथ-साथ कवि पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा हो जाता है, अगर कवि को दलित शब्द और दलित पैंथर आंदोलन के इतिहास के बारे में पता होता ! जहां से ये शब्द आया है, तो कवि इतनी हीनता में जवाब नही देता !

दलित शब्द स्वाभिमान का घोतक है. ब्राह्मणवाद का काट है. अपने को दलित वही कहेगा जो दलित चेतना से लैस होगा. और जो दलित चेतना से लैस होगा वो गर्व से कहेगा कि मैं दलित हूं. लेकिन इस कविता में कवि ने दलित शब्द का मानी ही खत्म कर दिया है.

अगर कवि ये कहता कि चमार हूं साब! या ये कहता कि डोम हूं साब! तो ये समझ में आता की चलो अभी इन तक दलित चेतना नहीं पहुंची है इसलिए ये अभी भी हीन भावना से ग्रस्त है. लेकिन यहां कवि खुद को दलित भी कह रहा है और हीनभावना से भी ग्रस्त है, ऐसा कैसे हो सकता है ? दरसल यहां कवि की अज्ञानता का पता चलता है, जिसे अभी तक दलित आंदोलन के इतिहास और दलित साहित्य विमर्श के बारे में ठीक से पता नहीं है. नहीं तो वो इतनी बड़ी भूल नहीं करता.

इसके बाद पूरी कविता गड़बड़ा जाती है, जिसमें दलित चेतना का नामो-निशान नहीं है. इतनी बेचारगी से भरी कविता तो हीरा डोम ने भी नहीं लिखा है. हर सवाल का जवाब जिस तरह से कविता में दिया जा रहा है, उससे दलितों के समाजिक, आर्थिक और राजनैतिक स्थिति का पता चलता है, जो इस कविता की अच्छी बात है. जो दलित राजनेताओं और उनकी पार्टियों पर एक करारा तमाचा है. जिन्होनें सत्ता पाने के लिए दलितो को एक वोट बैक के रूप में इस्तमाल तो किया लेकिन दलितों के समाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालात को नहीं बदला.

लेकिन ये समय दलितों के स्वाभिमान का समय है. ब्राह्मणवाद से निर्णायक लड़ाई लड़ने का समय है. छूआछूत जैसी अमानवीय प्रथा को खत्म करने का समय है, जिसमें यह कविता अपनी कोई भूमिका निभाती नहीं दिखती. ब्राह्मणवाद के सामने हाथ जोड़ने से दलितों को न तो मुक्ति मिली है और न ही मिलने वाली है.

Read Also –

प्रतिबंधित कविता – ‘कौन जात हो भाई ?’
जाति की आत्मकथा : कलवार, ठठेरा, कसाई
भात दे हरामजादे

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

रुस-नाटो महायुद्ध में रूस की बादशाह

Next Post

डराते हो गिरफ्तारियों से…?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

डराते हो गिरफ्तारियों से...?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

नीरव मोदी और राष्ट्रीय खजाने की लूट

August 8, 2018

क्यों शिक्षक दिवस पर मां सावित्री बाई फुले का जिक्र नहीं होता ?

October 1, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.