Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home कविताएं

डराते हो गिरफ्तारियों से…?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 17, 2023
in कविताएं
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
डराते हो गिरफ्तारियों से...?
डराते हो गिरफ्तारियों से…?

डराते हो गिरफ्तारियों से
डराते हो जेलों से
डराते हो यातनाओं, बंदूकों और हत्याओं से
तुम चाहते हो कि इन
गिरफ्तारियों, जेलों, यातनाओं, बंदूकों,
हत्याओं से डरकर
हम क्रांति का सपना छोड़ दें
अपने विचारों और सिद्धांतों से समर्पण कर दें

तो सुनो
हम वारिस हैं बुद्ध के
जिनके पास रहने के लिए
आलीशान महल था लेकिन उन्होंने
लोगों के दुःखों का कारण और
निवारण ढूंढने के लिए महलों और
तख्तों को लात मार दिया

You might also like

SEDITIOUS RIVER

कौन है श्रेष्ठ ?

स्वप्न

हम वारिस हैं महावीर के
जिनके पास वस्त्रों की कमी नहीं थी
लेकिन मुक्ति की तलाश में जो
विलासितापूर्ण जीवन को
लात मारकर नंगा निकल गए

हम वारिस हैं मार्क्स-एंगेल्स-लेनिन के
जिन्हें रोटी की दिक्कत नहीं थी
लेकिन सबके लिए रोटी-कपड़ा-मकान और
सम्मान के लिए जिन्होंने
खुद भूखा और परेशान रहना मंजूर किया

हम वारिस हैं स्टालिन-माओ के
जिन्होंने लाखों स्पार्टाकसों के सपनों को
जमीन पर उतारा और उसे
समाजवाद के लाल झंडे के रूप में
पहली बार धरती की अतल गहराईयों में गाड़ा

हम वारिश हैं भगत सिंह-उधम सिंह के
जिन्होंने हंसते हुए फांसी के फंदे को
सिर्फ इसलिए चूमा था की
उनकी कुर्बानी मिसाल बनकर
लाखों युवाओं को प्रेरणा देगी

हम वारिस हैं उस चारु मजूमदार के
जिसने 72 साल की उम्र में
पुलिसिया यातना झेलकर इसलिए
शहीद होना मंजूर किया
ताकि भारतीय क्रांति को
क्रांतिकारी दिशा दी जा सके

तुम उन्हें भला क्या डराओगे
जिन्होंने भूख से चिपके पेटों को देखा है
कर्ज में घुटते लोगों को देखा है
इलाज के अभाव में
दम तोड़ती सांसों को देखा है
दो-चार की अय्याशी को
कइयों की बजबजाती ज़िंदगी का
कारण बनते देखा है
जिन्होंने इंसान से उसकी इंसानियत
छीन लेने वाली व्यवस्था के दंश को देखा,
झेला और महसूस किया है
अगर तुम सोचते हो कि
तुम्हारी जेल की ऊंची-ऊंची
चहारदिवारियां, तुम्हारी गोलियां
उनके सपनों को कुचल देंगी
तो तुम गलती पे हो

ये पेशवाई का दौर नहीं है
ये नक्सलबाड़ी के दौर की निरंतरता है
उन लोगों का दौर है जिन्होंने
तुम्हारी जेलों और संगीनों के सामने
झुकने से इंकार कर दिया है
जिन्हें सर उठाना, सर कटाना और
सर कलम करना भी आता है

  • रितेश विद्यार्थी

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

‘कौन जात हो भाई ?’ दलित स्वाभिमान को मिट्टी में मिलाती एक कविता

Next Post

सांप्रदायिक हिंसा, कारपोरेटीकरण व तानाशाही के खिलाफ एकजुट हो-जन अभियान, दिल्ली

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

कविताएं

SEDITIOUS RIVER

by ROHIT SHARMA
September 7, 2025
कविताएं

कौन है श्रेष्ठ ?

by ROHIT SHARMA
July 31, 2025
कविताएं

स्वप्न

by ROHIT SHARMA
June 26, 2025
कविताएं

ढक्कन

by ROHIT SHARMA
June 14, 2025
कविताएं

मैं तुम सबको देख रहा हूं –

by ROHIT SHARMA
June 4, 2025
Next Post

सांप्रदायिक हिंसा, कारपोरेटीकरण व तानाशाही के खिलाफ एकजुट हो-जन अभियान, दिल्ली

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

बिहार विधानसभा चुनाव : जंगल राज की परिभाषा को संकीर्ण नहीं बनाया जा सकता

June 9, 2020

नागरिकता कानून से हासिल क्या हुआ ?

December 26, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.