Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

अडानी, अब तक की रिपोर्ट और पूर्व SEBI प्रमुख की ‘नौकरी’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 21, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

इस सरकार ने 10 साल जोर शोर प्रचार किया कि कालेधन पर रोक लगाने के लिए हजारों शेल कंपनियां बंद कराई गई हैं. उनकी अंतिम संख्या 3,80,000 बताई गई थी.

मेरा मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में कंपनियों के बैंक खाते, उनमें कम से कम 5,000 रुपये की जमा राशि, सब अगर एक कमरे में भी चल रहे हैं तो उनका किराया और सबके साइनबोर्ड, सुरक्षा कर्मी, दफ्तर में चाय-कॉफी आदि की व्यवस्था पर भी हर महीने लाखों रुपये खर्च हो रहे होंगे. हजारों लोगों को नौकरी मिली होगी.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

इन्हें बंद करवाकर आय या कोई और कर चोरी रोक कर जो पैसा मिला हो, उससे देश-समाज का उतना भला शायद ही हुआ हो. फिर भी यह सब किया गया. उसका नुकसान हुआ. लेकिन बाद में यह भी कहा गया कि शेल कंपनियों की परिभाषा ही तय नहीं है !

लेकिन उसमें मेरी छोटी-सी फर्म का चालू खाता भी बंद कर दिया गया और अब मेरा बैंक उसी खाते में न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने के लिए मुझसे प्रति तिमाही 1500 रुपए से ज्यादा लेता है और इसमें जीएसटी भी होता है. यानी अब यह वसूली भी ‘सेवा’ है !

उस समय मैं अपना पक्ष कहीं नहीं रख सका, मेरी चिट्ठी की पावती तक नहीं आई. और यह सब करके सरकार जी को मिला क्या ? अडानी की कंपनी में विदेश से निवेश आता रहा और वह राशि 20,000 करोड़ रुपए बताई जा रही है.

अगर सभी शेल कंपनियों को बंद नहीं किया जाता, तो इतने काले पैसे शेल कंपनियों के जरिये लगने का कोई उदाहरण या ठोस आंकड़ा नहीं है. ऐसे में असल में शेल कंपनियों को बंद करवाकर अडानी की सेवा की गई है.

अब पता चल रहा है कि उन शेल कंपनियों में से, जिनके जरिये अडानी के यहां निवेश हुआ है उसके खिलाफ मरीशस में कार्रवाई हुई थी और उसका लाइसेंस रद्द किया गया था.

भारतीय संदर्भ में देखें तो इन फर्मों पर जो आरोप है उनमें एक यह भी है कि मनी लांड्रिंग और टेरोरिस्ट फाइंनेंसिंग के जोखिम को कम करने के लिए निर्धारित आंतरिक व्यवस्था भी नहीं की गई थी. अब आतंकवाद रोकने के सरकारी प्रचार को भी याद कर लीजिये और जान लीजिये कि इस कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई.

जहां तक हिन्डनबर्ग रिपोर्ट का सवाल है, आपको याद होगा कि तब 20,000 करोड़ रुपये का एक पब्लिक इश्यु आया था, जो बाद में रद्द हो गया. आप जानते हैं कि देश बेचा जा रहा है और खरीदार एक ही है. खरीदार को और माल बेचा जा सके इसके लिए जरूरी है कि उसके पास (सफेद) पैसे हों.

हिन्डनबर्ग की रिपोर्ट से मोटा मोटी यह पता चला था कि शेयरों के भाव कृत्रिम रूप से बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपए के इश्यु से इतनी राशि (सफेद) इकट्ठी करने का उद्देश्य (और इससे ज्यादा खरीदारी करना) था. योजना गड़बड़ाई तो संभल नहीं रही है और नए खुलासे होते जा रहे हैं.

इस बीच, SEBI प्रमुख रहते हुए अडानी की जांच के लिए भेजी गई सामग्री का उस समय के SEBI प्रमुख ने क्या किया, उन्हें याद नहीं है. तब भी नहीं जबकि वे उनकी नौकरी करते हैं और आप समझ सकते हैं कि नौकरी मिलने का कारण उन सामग्रियों पर कार्रवाई नहीं करना (और गायब कर देना) भी हो सकता है.

ईमानदारी स्थापित करने, भ्रष्टाचारियों को नहीं बख्सने और तरह-तरह की मौखिक गारंटी लेने वाले विश्व गुरू इसपर कुछ भी बोलते नहीं हैं. लगता है इस चुनाव के लिए उन्होंने सनातन का देखने-बचाने का ठेका लिया है.

  • संजय कुमार सिंह

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

ऐतिहासिक ‘सभ्यताएं’ हिंसा, जोर-जबर और औरतों के दमन पर टिकी थी

Next Post

निरंकुशता के विरुद्ध : तख्तापलट के पचास बरस और चिली का प्रतिरोधी सिनेमा

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

निरंकुशता के विरुद्ध : तख्तापलट के पचास बरस और चिली का प्रतिरोधी सिनेमा

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

सोवियत साहित्य से प्रथम परिचय – वे तीन

March 4, 2022

अदानी को मुनाफा देने के लिए बिजली संकट पैदा किया जा रहा है

October 14, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.