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Home गेस्ट ब्लॉग

डार्विन, जिसने सारी पुरानी मान्यता को ध्वस्त कर दिया

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 6, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
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डार्विन, जिसने सारी पुरानी मान्यता को ध्वस्त कर दिया
डार्विन, जिसने सारी पुरानी मान्यता को ध्वस्त कर दिया

सृष्टि में तेज आवाजें आ रही थी, मानो सभी ग्रह एक दूसरे से टकराने वाले हैं. पृथ्वी पर कुछ अलग ही वातावरण निर्मित हो रहा था. सूरज की किरणें तेज थी, अचानक अंधेरा छा गया और बारिश होने लगी. पृथ्वी के ईडन गार्डन में एक ईश्वरीय शक्ति ने एक विशाल मोटो आकार के पत्थर पर मिट्टी से दो इंसान को बनाया ADAM और EVE.

यहूदी, ईसाई और इस्लाम का मानना है वो पत्थर जिस पर आदम और ईव का जन्म हुआ DOME ऑफ ROCK है. अब्राहमिक धर्मों का मानना है इसी पवित्र स्थान पर एक ईश्वर ने पूरे कायनात को बनाया.

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भारतीय महाद्वीप पर हजारों साल पहले ब्रह्मा नाम के देवता ने अपनी शक्ति से सृष्टि की रचना की और उसके बाद अपने मुख से ब्राह्मण, भुजाओं से क्षत्रिय, जांघ से वैश्य और पैरों से शूद्र की रचना की.

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19वीं सदी. स्थान इंग्लैंड. वर्ष 1831. चार्ल्स डार्विन ने कहा पिताजी हमकों विकासवाद पर शोध अध्ययन करने के लिए दुनिया घूमना है.

पिताजी ने कहा, तो जाओ किसने रोका है. डार्विन ने कहा जहाज HMS BEAGLE समुद्री यात्रा पर जा रहा है, यात्रा के पैसे लगेंगे.

पिता ने कहा, तुम्हारे दादा परदा सब डॉक्टर और तुम डॉक्टर की पढ़ाई छोड़कर, कला में पढ़ाई किया. तुमने परिवार की नाक काट दी.

आखिर परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा समझाने के बाद डार्विन के पिता मान गए.

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27 दिसंबर 1831 में इंग्लैंड से HMS Beagle की समुद्री यात्रा शुरू हुई. समुद्री बुखार से चार्ल्स डार्विन बहुत बीमार पड़े. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी.

चार्ल्स डार्विन का जहाज जब मेक्सिको के दक्षिण में Galapagos द्वीप समूह पर पहुंचा तो यहीं से इतिहास बदलने की शुरुआत हुई.

चिड़ियों, कछुआ, मछलियां, बंदर और अन्य जीव जंतुओं पर शोध अध्ययन करने के बाद चार्ल्स डार्विन ने पाया सभी जीव जंतुओं के साझा पूर्वज हैं.

उदाहरण : मुर्गियां, ऑस्ट्रिच आदि पक्षी से मिलते जुलते जीव देखिए, इनके पंख होते हैं लेकिन वो उड़ते नहीं, केवल दौड़ते चलते हैं.

विकासवाद का सबूत है यह पक्षी ऐसे वातावरण वाले इलाके में रहे जहां भोजन के लिए उड़ने की आवश्यकता नहीं थी और इनका उड़ना छूट गया.

बंदर, चिम्पांजी और इंसान के एक ही पूर्वज थे. बंदरनुमा इंसान की कुछ प्रजाति पेड़ों से नीचे उतर आए और ज़मीन पर चलना शुरू किया. भोजन और शिकार करना शुरू किया.

पेड़ों पर झूलना छोड़ दिया, इसके कारण उनके हाथ छोटे हो गए. हज़ारों सालों के विकास क्रम के अनुसार इनकी शारीरिक बनावट में कई बदलाव आए. सुरक्षा की दृष्टि से चार पैरों पर चलने लगे और हाथ पत्थरों से औजार बनाने लगे.

अब सवाल करेंगे आज के बंदर इंसान क्यों नहीं बनाते. क्योंकि वे पेडों पर झूलना बंद नहीं कर रहे हैं. लाखों साल जिन बंदरों ने पेडों पर झूलना बंद किया वही इंसानी प्रजाति के पूर्वज हैं.

चार्ल्स डार्विन के अनुसार विकासवाद कभी रुकता नहीं. हमेशा चलते रहता है. वातावरण हमेशा बदलता है और बदलते वातावरण में अपने जीवन को ढालना होता है. जो नहीं ढाल पाता प्रकृति उन्हें नष्ट कर देती है.

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चार्ल्स डार्विन लगातार पांच वर्ष तक समुद्री यात्रा की. तीन साल ज़मीन पर और 18 महीने समुद्र में गुजारा. HMS Beagle की समुद्री यात्रा 2 अक्टुबर 1836 को समाप्त हुई.

चार्ल्स डार्विन अपनी शोध में धर्म की उस धारणा को पलट दिया जिसमें इंसान की मान्यता है वो धरती पर सीधे उतारा गया श्रेष्ठ प्राणी है.

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चार्ल्स डार्विन ने चर्च के कानून के डर से अपनी थ्योरी को उजागर नहीं किया. 23 वर्ष के बाद यानी 1859 में ORIGIN OF SPECIES की रचना प्रकाशित की और उनकी नई थ्योरी ने सारी पुरानी मान्यता को ध्वस्त कर दिया. और ईश्वर के बनाए इंसान को जानवरों के खानदान का बता दिया.

  • क्रांति कुमार

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