Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

गांधी, नेहरू और सुभाष

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 24, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
गांधी, नेहरू और सुभाष
गांधी, नेहरू और सुभाष

श्याम बेनेगल की फिल्म ‘नेताजी द अनफॉरगोटेन हीरो’ में एक दृश्य है. 10 दिसंबर 1942 की सुबह सुभाष बाबू बर्लिन में बैठकर अखबार पढ़ रहे हैं, तभी उनके सहयोगी एसीएन नांबियार वहां आए. सुभाष बाबू ने अखबार बढ़ाते हुए नांबियार से ‘क्विट इंडिया मूवमेंट’ और गांधी जी की गिरफ्तारी की ख़बर सुनाई. बोस ने ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ और ‘करो या मरो’ का जिक्र करते हुए कहा कि ‘हमें आज ही अपने रेडियो से महात्मा जी की हिमायत में स्टेटमेंट देना होगा.’ नांबियार ने पलटकर पूछा ‘आज अचानक गांधीजी के लिए इतनी हमदर्दी क्यों ?’ सुभाष बोस ने कहा कि ‘बापू से मेरा क्या रिश्ता है ये और कोई नहीं जान सकता. ये सही वक़्त था मेरे वहां रहने का.’

महात्मा गांधी के लिए सुभाष चंद्र बोस के मन में कितना सम्मान था, ये बर्मा से रेडियो प्रसारण में बापू को राष्ट्रपिता संबोधित करके उन्होंने ज़ाहिर किया था लेकिन बर्मा से 22 फरवरी 1944 को कस्तूरबा गांधी के निधन के बाद नेताजी ने रेडियो से जो बयान जारी किया था उससे सुभाष और गांधी के रिश्तों की असली गहराई पता चलती है. नेताजी ने कहा –

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

‘कस्तूरबा की मृत्यु पर देश के 38 करोड़ 80 लाख और विदेश में रहने वाले मेरे देशवासियों के गहरे शोक में मैं उनके साथ शामिल हूं. उनकी मौत एक दु::खद परिस्थितियों में हुई है लेकिन एक गुलाम देश के वासी के लिए कोई भी मौत इतनी सम्मानजनक और इतनी गौरवशाली नहीं हो सकती. हिन्दुस्तान को एक निजी क्षति हुई है. इस महान महिला को जो हिन्दुस्तानियों के लिए मां की तरह थी, मैं अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, और इस शोक की घड़ी में मैं गांधीजी के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं.’

गांधीजी के अलावा पंडित नेहरू से भी सुभाष बोस का आत्मीय रिश्ता था. जब पंडित नेहरू अपनी पत्नी कमला नेहरू का इलाज कराने के लिए ऑस्ट्रिया के वियना पहुंचे तो वहां पहले से मौजूद सुभाष बोस और एसीएन नांबियार ने पंडित नेहरू का स्वागत किया. स्विट्जरलैंड को लोजान शहर में जब कमला नेहरू की मौत हुई तो वहां पंडित नेहरू और सुभाष चंद्र बोस दोनों मौजूद थे.

कमला नेहरू के इलाज के साथ-साथ उनके अंतिम संस्कार में भी सुभाष चंद्र बोस नेहरू के साथ खड़े रहे. इस घड़ी में दोनों की दोस्ती और प्रगाढ़ हो गई थी. यही वजह है कि जब सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिंद फौज में ब्रिगेड का गठन किया तो उसमें ‘गांधी ब्रिगेड’ और ‘नेहरू ब्रिगेड’ भी बनाई. 1945 में पंडित नेहरू को जब नेताजी के विमान हादसे की ख़बर मिली थी तो वो पहली बार सबके सामने फूट-फूटकर रोये थे. इससे पहले पंडित नेहरू सार्वजनिक रूप से कभी नहीं रोए.

2016 में नेताजी से जुड़ी हुई गोपनीय फाइलें जब सार्वजनिक की गईं तो उम्मीद थी कि कई सारे साक्ष्य ऐसे बाहर आएंगे जिसमें गांधी और नेहरू से सुभाष के मतभेद और ज़ाहिर होंगे. लेकिन इससे उलट एक बात ये सामने आई कि नेताजी सुभाष की पत्नी एमिली शेंकल और उनकी बेटी अनिता बोस का सबसे ज्यादा ख्याल किसी एक शख्स को था तो वो थे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू.

गोपनीय फाइल में ये खुलासा हुआ कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 1954 में नेताजी की पुत्री की मदद के लिए एक ट्रस्ट बनाया था, जिसके जरिये अनिता बोस को हर महीने 5 सौ रूपये की आर्थिक मदद दी जाती थी. दस्तावेजों के मुताबिक 23 मई 1954 को अनिता बोस के लिए 2 लाख रूपये का एक ट्रस्ट बनाया गया था, जिसके ट्रस्टी थे प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी रॉय.

ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने 1964 तक अनिता बोस को हर साल 6000 रूपये की मदद की जो उनकी शादी तक जारी रही. उस वक्त 500 रूपये महीना कोई छोटी रकम नहीं थी. ये भी कहा जाता है कि पंडित नेहरू जबतक जीवित रहे सुभाष बोस की पत्नी एमिली शेंकल को हर महीने दार्जीलिंग की चायपत्ती अपने खर्चे से भेजते रहे. ज़ाहिर है पंडित नेहरू के मन में सुभाष की दोस्ती आजीवन बनी रही.

क्रांतिकारी भगत सिंह हिन्दुस्तान के लिए पंडित नेहरू और सुभाष चंद्र बोस की अहमियत भली भांति जानते थे. 1928 में जब भगत सिंह की उम्र महज 21 साल थी उन्होंने ‘किरती’ नामक पत्र में नए नेताओं के अलग-अलग विचार नाम से एक लेख लिखा था. इस लेख में भगत सिंह ने लिखा था कि ‘सुभाष परिवर्तनकारी हैं जबकि नेहरू युगांतरकारी.’ फांसी दिए जाने से दो घंटे पहले जब भगत सिंह के वकील प्राण नाथ मेहता उनसे मिलने पहुंचे तो भगत सिंह ने कहा था कि ‘वे पंडित नेहरू और सुभाष बोस को मेरा धन्यवाद पहुंचा दे जिन्होंने मेरे केस में गहरी रूचि ली थी.’

देश के राष्ट्रनिर्माताओं की भूमिका को अलग-अलग देखने की बजाए, आज जरूरत उनकी सामूहिक भूमिका को देखने की भी है. नेताजी के बगैर गांधी और नेहरू दोनों अधूरे लगेंगे. अगर हमने अपने राष्ट्रनिर्माताओं की एकल भूमिका लिखनी शुरू कर दी तो हम कभी भारतीय स्वाधीनता संग्राम का इतिहास नहीं लिख पाएंगे.

  • राजेश कुमार

Read Also –

सवाल आया है- सुभाष तो चुने गए अध्यक्ष थे, तो गांधी ने काम क्यों नहीं करने दिया ?
… ऐसी थी भारतीय संसद की शुरुआत
आरएसएस का सैनिकद्रोही बयान, देशद्रोही सोच एवं गतिविधियां
गांधी से मोदी की तुलना हास्यास्पद ही नहीं, गांधी के लिए अपमानजनक भी है
भारत ने अंग्रेजों से औपचारिक स्वतंत्रता कैसे हासिल की ? – यान मिर्डल
ब्रतानिया हुकूमत का चरण वंदना करने वाले आज हमें राष्ट्रवाद का उपदेश दे रहे हैं

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

गुरू घंटाल

Next Post

आगामी बीस सालों में समाज का संपूर्ण लंपटीकरण हो जायेगा अगर…

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

आगामी बीस सालों में समाज का संपूर्ण लंपटीकरण हो जायेगा अगर...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

निपूतों के गैंग को आपके बच्चे चाहिए…

December 2, 2024

लानत है !

July 19, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.