Saturday, June 13, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

मोदी ‘परमात्मा’ के एजेंट है, तो उसी का रहे, हमारा पीछा छोड़ें, हमें अपना प्रधानमंत्री चुनने दें

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 30, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
मोदी 'परमात्मा' के एजेंट है, तो उसी का रहे, हमारा पीछा छोड़ें, हमें अपना प्रधानमंत्री चुनने दें
मोदी ‘परमात्मा’ के एजेंट है, तो उसी का रहे, हमारा पीछा छोड़ें, हमें अपना प्रधानमंत्री चुनने दें
विष्णु नागर

अपने मोदी जी को लगने लगा है कि वे देवदूत हैं. इन्हें ऐसी अनुभूति होने लगी है कि इन्हें इनकी मां ने जन्म नहीं दिया है. इन्होंने बायोलाजिकली शरीर धारण किया ही नहीं है, बल्कि ये ‘प्रगट’ हुए हैं. ‘परमात्मा’ ने इन्हें ऊपर से टपकाया है. ये ‘प्रगट कृपाला, दीनदयाला’ हैं. इनका रूप ‘अद्भुत’ है. इनके लोचन ‘अभिराम’ हैं, इनके नयन ‘विशाल’ हैं. ये सब गुणों के आगर हैं, खान हैं. ये वे हैं, जिनकी स्तुति संत गाते हैं, ये जन अनुरागी हैं.

बहुत सारे मुगालते इन्होंने अपने बारे में पाल रखे हैं, जबकि ‘प्रगट कृपाला’ राम के बारे में जितना पढ़ने को मिलता है, उससे लगता है कि उन्हें ऐसा कोई भ्रम नहीं था. उनका जन्म मां के पेट से हुआ था. वे कहीं से न टपके थे, न टपकाए गए थे. उनकी मां थी, पिता थे, भाई थे, सभी भाइयों की पत्नियां थीं. उन्होंने कभी इससे मना नहीं किया कि कौशल्या उनकी मां नहीं थी. उन्होंने बायोलॉजिकली उन्हें जन्म नहीं दिया था. लगता है वे इतने कृतध्न नहीं थे. उच्च कोटि के ऐसे ‘महाप्रभु’ नहीं थे, जितने ये थे ! इनका तो जन्म ही नहीं हुआ है, प्रकटीकरण हुआ है. ये तो राम के भी ऊपर हैं.

You might also like

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

बेचारे व्यर्थ ही अहमदाबाद मां के ‘दर्शनों’ के लिए टीवी कैमरा ले जाते रहे, न्यूज बनवाते रहे, जबकि वह इनकी मां थी ही नहीं ! फिलहाल इन्होंने गंगा को मां का दर्जा दे रखा है. कह रहे हैं गंगा मां ने उन्हें गोद ले रखा है. वह भी कितने दिन तक इनकी मां रह पाती हैं, कौन जाने ! कब कौन इनकी मां बन जाए और कब अपदस्थ कर दी जाए, कुछ पता नहीं !

पाखंडेश्वर जी कहते हैं, परमात्मा ने इन्हें विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए भारत भू पर टपकाया है. जिसने इन्हें टपकाया है, वही इनको दिशा भी दे रहा है, सामर्थ्य भी दे रहा है, ऊर्जा भी दे रहा है, प्रेरणा भी दे रहा है और भी जाने क्या-क्या दे रहा है और ये लेते जा रहे हैं. और ‘परमात्मा’ की इन पर ऐसी अटूट कृपा है कि ये 2047 में भारत को ‘विकसित’ बनाकर ही इस धरा धाम से विदा लेंगे तो लेंगे ! यानी उम्र के 97 वर्ष तक ये हमारी छाती पर मूंग, उड़द सब दलना चाहते हैं, जबकि हमारी छाती इतनी मजबूत नहीं है ! जनता का मूड इन ‘अविनाशी’ जी को अभी ही विदा करने का है.

आप क्या समझते हैं, होश में रहकर कोई आदमी ऐसी बहकी-बहकी बातें कर सकता है ? एक स्वस्थ दिमाग का आदमी ऐसा कर सकता है क्या ? कर सकता है क्या ? नहीं कर सकता. लगता है इंडिया गठबंधन ने इन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचाया है. अभी ये इतने गहरे सदमे में हैं कि ये कम से कम चार बार ऐसी बेतुकी-हास्यापद बात कर चुके हैं. ये इनकी रणनीति नहीं, इनकी विकल मानसिक अवस्था का संकेत है.

हर संवेदनशील आदमी को उनकी इस मानसिक अवस्था से सहानुभूति होना चाहिए. इस वक्त उनका मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए. यह नहीं कहना चाहिए कि क्या ‘परमात्मा’ को भारत भूमि पर एक अनोखे ये ही नमूना मिला था-भेजने के लिए ? 2002 का यह ‘खलनायक’ उन्हें इतना पसंद आया ? अडानी-अंबानी का ये सेवक इतना अच्छा है कि गंगा ने उसे गोद ले लिया ? जिसने पूरे मीडिया को अपनी गोद में बैठा रखा है, उसे आपने गोद ले लिया गंगा जी ? इतना बोझ सह लेंगी आप ?

जब बिना भांग धतूरा खाए कोई ऐसी बात करने लग जाए तो साफ है कि ऐसा आदमी ‘परमावस्था’ में पहुंच गया है. वह होश में नहीं रहा. ये उस अवस्था से भी आगे पहुंच गया है, जहां आदमी अकसर भांग-धतूरा खाकर पहुंचता है, मगर नशा उतरते ही फिर जमीन पर लौट भी आता है. ये चू़कि बिना खाये ही वहां पहुंच गए हैं, इसलिए ये अधिक खतरनाक हैं. हमें तो वैसे भी चुनाव के जरिए एक सांसद चाहिए, एक प्रधानमंत्री चाहिए. अडानी का सेवक, नफरत का मसीहा ‘देवदूत’ के रूप में नहीं चाहिए. हम ‘देवदूत’ चुनने के लिए वोट देते नहीं. देवदूत चुनना-न चुनना ‘परमात्मा’ का विषय है, हमारा नहीं !

वैसे अगर मोदी जी देवदूत हो चुके हैं तो उन्हें वोट की जरूरत भी क्या ? जिसे परमात्मा अपना वोट दे चुका है, उसे हम मनुष्यों के वोट की आवश्यकता क्यों हो ? उसे प्रधानमंत्री बनने की भी जरूरत क्या ? जिसे ईश्वर ने भेजा है, जनता भी उसे संसद में भेजे, यह मजबूरी क्यों ? यह तो वैसे भी उस ‘देवदूत’ के साथ ज्यादती है. वह देवदूत है, तो रहे, हम तो वैसे भी उसे अपना दूत चुन नहीं रहे हैं. हमने उसे ‘परमात्मा’ को पूरी तरह समर्पित कर दिया है, अब वे जानें और मोदी जी जानें !

मोदी जी को दिशा, शिक्षा, सामर्थ्य सब ‘परमात्मा’ दे रहा है, तो ये उसी का काम करें. डबल ड्यूटी न करें. ये उसके एजेंट हैं तो उसका काम ईमानदारी से करे. हमें अपना सही या गलत एजेंट चुनने दे. पछताएंगे तो हम पछताएंगे, हमारी ओर से ‘परमात्मा’ पछताने नहीं आएंगे !

वैसे आज तक हमने कोई देवदूत कहीं देखा नहीं. कोई देवदूत चुनाव लड़ा है, यह सुना नहीं. उसे लोगों ने प्रधानमंत्री बनाया है, यह कहीं लिखा हुआ देखा नहीं ! हम परंपरा पर चलनेवाले लोग हैं. हम परमात्मा के दूत को वोट देकर परमात्मा का काम मुश्किल नहीं बनाएंगे. हम डबल ड्यूटी के खिलाफ हैं !

ये बातें देवदूत जी को आसानी से ही क्या मुश्किल से भी समझ में नहीं आएंगी, वोटर अभी भी थोड़ा सा मौका है. इन्हें इस बार इतना ज्यादा अच्छी तरह समझा दो कि ये अपना देवदूतपन भूल जाएं ! फिर भले ये 97 क्या डेढ़ सौ साल तक जिएं मगर भारत का पीछा छोड़ें. उसे विकसित बनाने में दिलचस्पी लेना बंद करें. इसे जो बनाना होगा, हम सब मिलकर बनाएंगे. ओके, परमात्मा के प्रतिनिधि जी, आपको हमारा नमस्कार.

Read Also –

मोदी सिर्फ अडानी अम्बानी ही नहीं, राजे-रजवाड़ों और उनकी पतित संस्कृति और जीवनशैली तक को पुनर्प्रतिष्ठित कर रहा है
18वीं लोकसभा चुनाव : मोदी सरकार के 10 साल, वादे और हक़ीक़त
फकीरचंद का परिवारवाद
आरएसएस-मोदी की महानतम उपलब्धि है – अविवेकवाद 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

करकरे को किसने मारा ? भारत में आतंकवाद का असली चेहरा

Next Post

अत्यंत महत्वपूर्ण ख़बर जिसे इंडियन मीडिया ने मार डाला

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
Next Post

अत्यंत महत्वपूर्ण ख़बर जिसे इंडियन मीडिया ने मार डाला

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

राजनैतिक नियोग : बचे 77 दिन में विकास पैदा हो जाये तो आश्चर्य मत कीजियेगा !

January 20, 2019

रुस-नाटो महायुद्ध में रूस की बादशाह

August 21, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

June 10, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.