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Home कविताएं

मुझे चक्रवर्ती बनना है…

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 10, 2024
in कविताएं
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मुझे चक्रवर्ती बनना है...
मुझे चक्रवर्ती बनना है…

1. समर्पण

चक्कर में पड़ा
मैं अपने तलवों में
चक्र तलाश रहा हूं
असल में मुझे चक्रवर्ती बनना है

सुबह सुबह पंडी जी को बुलाया हूं
मुझे जानना है कि
मुझे आज किस दिशा से घर से
बाहर निकलना है

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स्वप्न

पढ़ने को मैं विज्ञान पढ़ा हूं
लेकिन मानने को विज्ञान नहीं
निर्मल बाबा को मानता हूं
शिव लिंग पर रोज जल चढ़ाता हूं
खूब प्रातः गणेश वंदना करता हूं

इंजीनियर हूं तो क्या हुआ
अपने डॉक्टर मित्रों के साथ
साल में कम से कम एक बार
वैष्णव देवी के दर्शन जरूर कर आता हूं

मैं विश्व हिन्दू परिषद् का
एक सक्रिय कार्यकर्ता हूं
और मेरी इच्छा है भारत
जितना जल्द हो एक सशक्त हिंदू राष्ट्र बने
और इस आशय मेरा समस्त तन मन धन
इस हिंदू हृदय सम्राट के लिए समर्पित है

2. आदमी

इससे क्या फर्क पड़ता है
वह हिंदू नहीं है
वह क्रिश्चियन, मुसलमान, … है
फर्क तब जरूर पड़ता है
जब वह आदमी
तथाकथित हिंदू
क्रिश्चियन, मुसलमान,…हो कर भी
जब आदमी नहीं होता है

3. मेरी खिड़की के सामने का गुलमोहर

राष्ट्रवाद का चाकू जहां था, वहां सुरक्षित है
सीमा चाक चौबंद है
दिल्ली दरबार लग चुका है
हिंदुत्व आईसीयू में अब खतरे से बाहर है
बिनोवा भावे का आमरण अनशन टूट चुका है
एक घोर जातिवादी दुकान की
बगल एक विकासवादी दुकान खुल गई है

टारगेट अचीव हो गया है
अब पुलवामा की चर्चा उचित नहीं
चुनाव आयोग और उसकी आचार संहिता
नमक तेल मिला मसालेदार अचार है
जिसकी एक मात्र उपयोगिता
बेस्वाद खाने का स्वाद बढ़ाना है
जो कांच के बोएम में
पहले की तरह
अब वापिस सुरक्षित है
आप सहमत असहमत हो सकते हैं,
पूरी छूट है
लेकिन भारतीय न्याय व्यवस्था एक
लाइसेंसी कसाईखाना है
जहां से रोज डब्बाबंद
हाइजिन बीफ का निर्यात होता है
आपने कभी नियमित मिर्च खाते
पिंजड़ाबंद तोता देखा है
राष्ट्रपति भवन के सामने खड़ा यह
खूबसूरत नजारा बखूबी देख सकते हैं
बाकी खबरों के लिए
भक्ति चैनल जब चाहें खोल लें

मेरी खिड़की के सामने का गुलमोहर लहक रहा है

4. स्वीमिंगपूल

बहुत दिन हुए
इस स्वीमिंगपूल में
किसी ने तैरा नहीं
बहुत दिन हुए
इसके पानी बदले
मेकेनिज्म में
कुछ तो दिक्कत है
कोई तो मंतव्य है
कीड़े-मकोड़े पड़ सकते हैं
क्लोरीन का असर भी अब जाता रहा
कम से कम
आउटलेट वाल्व ही खोल देते
ठहरा पानी निकल जाता
कीड़े पनपाने का क्या फायदा
बदबू फैलेगी, तो क्या अच्छा लगेगा

5. सौदा न्याय का

सौदा न्याय का
धोखे का
कोई भी हो सकता है
लाभ एक ज़रूरी शर्त है

बजने को
हारमोनियम बजता है
तबला बजता है
बजने को तो
टीन का ख़ाली
कनस्तर भी बजता है

मानते हैं
भाला फेंकना
छल्ला फेंकना
मुश्किल काम है
लेकिन उससे भी
ज़्यादा मुश्किल काम
अपने को मार कर
झूठ फेंकना है

दूध
टेट्रा पैक का
अच्छा रहता है
मौसम कोई हो
फटता नहीं
बहुत दिन चलता है

टोडरमल के
शुक्रगुज़ार हैं
हमारे पास आज
ज़मीन का अपना हिसाब है

जिस किसी ने
सिंधु को हिंदू कहा
उसका यह ग़लत उच्चारण
आज एक नया भूगोल दे गया

भक्तों के भक्तिकाल में
मनसबदारी लेनी होती
तख़्त बचाना होता
बेटियां हमेशा
काम की चीज़ रहीं
तब वह नाक नहीं
काग़ज़ की चिंदी थीं

वामपंथियों ने इतिहास का
कबाड़ा कर दिया
हारा हुआ अकबर को
जीता हुआ बता दिया
इन ग़द्दारों को कैसे माफ किया जा सकता है

रिचर्ड एटनबरो के
शुक्रगुज़ार हैं
जिन्होंने गांधी नाम का
एक नायाब महात्मा दिया

जिस अंडे को उठाओ
सड़ा मिलता है
चूज़े निकलने से रहे
कार्टून बदलना
एक बेहतर विकल्प है

  • राम प्रसाद यादव

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