Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

शिव की अभय मुद्रा : संसद में ‘शिव’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 2, 2024
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
शिव की अभय मुद्रा : संसद में 'शिव'
शिव की अभय मुद्रा : संसद में ‘शिव’

लोकसभा में बतौर विपक्षी नेता राहुल गांधी ने शिव की मूर्ति क्या दिखाया, भाजपाइयों को एकबारगी सांप सूंघ गया. अचानक से उसे सारे नियम कायदे याद आ गये. सारे अनुच्छेद मंत्रों की तरह पढ़े जाने लगे. मोदी उठ खड़े हुए और अमित शाह संरक्षण की याचना करने लगे. और एक झटके में दिखी शिव की छवि लोकसभा के कैमरों से यूं गायब हो गया मानो भूत देख लिया हो.

शिव की इस छवि के तहों में छिपे थे इस देश के लोगों के सवाल. किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों, युवाओं और छात्रों के सवाल. इस देश के सैनिकों के सवाल जिसे मोदी सत्ता ने अग्निविरों के रुप में रख कर सैनिकों को नैतिक और भौतिक दोनों रुपों में कमजोर कर दिया. नरेन्द्र मोदी जो खुद को नन-बॉयलॉजिकल प्रोडक्ट बताते हैं और परमात्मा से सीधे वार्तालाप करते हैं, लोकसभा में पूरी तरह नंगा हो गये.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

लोकसभा में राहुल गांधी के सवालों से बौखलाये ‘स्पीकर’ ओम बिड़ला, जो खुद आकंठ भ्रष्टाचार में डुबे हैं (ज्ञातव्य हो कि ओम बिड़ला की मॉडल बेटी यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को पहली ही बार क्रैक कर आईएएस बन गई, जिसके लिए देश के युवा वर्षों कठिन तैयारी करते हैं, फिर भी सफल नहीं हो पाते) को अचानक से ‘शिष्टाचार’ याद आ गया और उम्र में छोटे-बड़े का ज्ञान देने लगे, जिसका राहुल गांधी ने बेहद ही सटीक जवाब यह कहते हुए दिया कि ‘सदन में सबसे बड़े स्पीकर होता है, जिसका सम्मान हम सभी को करना चाहिए.’

सदन में राहुल गांधी ने जिस तरह शिव के सहारे नफरतों और हिंसा के सरगना नरेन्द्र मोदी, भाजपाई और आरएसएस को एक्सपोज किया है, वह आगे वर्षों तक गूंजता रहेगा. यहां एक तथ्य स्पष्ट करना बेहद जरुरी है कि जिन्हें देश आज ‘शिव’ के रुप में जानता है, दरअसल वे गौतम बुद्ध हैं, जिनकी ख्याति न केवल सम्पूर्ण भारत में बल्कि समूची दुनिया में रही है.

ब्राह्मणवादियों ने जिस तरह आज हर महत्वपूर्ण जगहों, संस्थाओं का नाम बदल रहा है, उसकी तरह सैकड़ों वर्ष पूर्व ब्राह्मणवादियों ने बुद्ध को रूपांतरित कर शिव कर दिया. बहरहाल, मनीष सिंह ने संसद में राहुल गांधी द्वारा शिव की छवि को जिस तरह प्रस्तुत किया है, उसका बेहतरीन विश्लेषण इस प्रकार किया है.

शिव देवाधिदेव हैं…वे देवो के देवता हैं. मनुष्यों के देव हैं, महादेव हैं. लेकिन वे दैत्यों के भी देवता हैं. हर असुर ने उनका पूजन किया, वरदान पाए. शिव ने भक्त भक्त में भेद नहीं किया. उसकी जाति नहीं देखी, रंग और पूजन पद्धति का भेद नहीं देखा. वे तो मानव और पशु का भी भेद नहीं देखते. तो पशुओं के भी देवता वही है, पशुपति हैं.

शिव चतुर और कुटिल चाणक्य नहीं हैं, वे तो भोलेनाथ हैं, औघड़दानी हैं. शिव की महानता उनकी इसी साधारणता में है. हीरे-मोती-सिक्के और नोट नहीं जनाब, वे बेल के पत्तों में खुश हैं. कतरा भर भांग की बूटी में खुश हैं, धतूरे के एक फूल, बेल के तीन पत्तों से खुश हैं. श्मशान की राख से खुश हैं.

क्या कीर्तन, भजन, संगीतय आराधना- शिव तो अनगढ़ डमरू की आवाज में खुश हैं. कोई विधि नहीं, नियम नहीं, शिव की आराधना कीजिए, तो बस, उनका नाम लीजिए या न भी लीजिए. क्योंकि शिव ही सत्य हैं, सुंदर हैं. तो जिसमे सत्य है, सुंदरता है, वह शिव ही है. लेकिन यहां तो सुंदरता भी बाधा नहीं. उनके गण, उनके भक्त, असुंदर भी है…चलेगा.

गंजेड़ी, भंगेड़ी, शराबी भी बिना अपराध बोध के, भरपूर नशे में प्रभु को याद करता है, तो जै भोलेनाथ ही कहता है. तो क्या आश्चर्य की शिव सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले देव हैं. विश्वास नहीं ??? तो जरा आंख बंद कीजिए, अपने घर से पांच किलोमीटर के दायरे में सारे छोटे देवस्थलों को याद कीजिए. मेरा दावा है आपको, सत्तर प्रतिशत सिर्फ शिव के स्थान मिलेंगे, 20 प्रतिशत हनुमान हैं, और बाकी तमाम देवता मिलकर शायद 10% भी आराध्य नहीं.

कारण उनकी सरलता है. शिव को मंदिर नहीं चाहिए. तालाब के किनारे, वृक्ष के नीचे, घने वन में, सड़क के किनारे, खुले में शिव बैठे हैं, और मस्त हैं. उसी लोटे से तालाब में खुद नहाइये, और फिर उसी तालाब का पानी, उसी लोटे में भरकर, तालाब के किनारे शिवलिंग पर चढ़ा आइये. शिवा इज मोर देन हैप्पी !!!

तो ईश्वर अगर सर्वव्यापी है, तो शिव को इस कसौटी में 100 में से 100 नम्बर हैं. वे कण कण में हैं, गण गण में, घट घट में हैं. स्फटिक नहीं, सोना नहीं, हीरा नहीं, संगमरमर नहीं. हर मामूली पत्थर, बर्फ का टुकड़ा, मिट्टी की लोई, शिव बन सकती है, महादेव हो सकती है. मगर जब भाजपा जब शिव को खोजती है, राम को खोजती है- तो जाने क्यूं, मस्जिदों में, फवारो ही खोजती है. पुलिस और न्यायालय से सर्वे करवाती है.

शिव बेशक उस फवारे में भी है। वे किसी मस्जिद में भी धूनी रमाये हुए हैं. यह मानने के लिए कोर्ट से सर्वे करवाने की जरूरत सिर्फ उन्हें है, जिन्होंने शिव को लिंग में, शिवालयों में, महालयों में कैद करने का षड्यंत्र किया है. वही लोग, जिन्होंने हर-हर और घर-घर के नारे से महादेव को हटाकर, किसी मलिन को स्थापित कर दिया है.

आज शिव संसद में दिखे. उनकी निडरता, उनकी सरलता, उनकी अभय मुद्रा पर बात हुई, तो सबने देखा, सत्ता पक्ष कैसा भयभीत हो गया…राम के नाम पर राजनीति करने वालो को, सदन में शिव की तस्वीर असंसदीय लगी. वे जानते हैं, कि शिव तो सत्ता नहीं देखते, पक्ष और विपक्ष नहीं देखते. उन्हें अपने गण प्रिय है. अपने जन प्रिय है. जन गण मन की वे जाति नहीं देखते, धर्म नहीं देखते. बस पीड़ा देखते हैं और उनकी आर्तनाद पर त्रिशूल उठाये दौड़े चले आते हैं.

और जिस सदन की दरो दीवार पर जन गण मन पर अत्याचार के जोशीले नारे गूंज चुके हैं, वहां शिव के पदार्पण से मैं भी डरता हूं. जाने किसकी अनकही आर्तनाद शिव सुन लें. दौड़े आयें. त्रिशूल से वज्रपात हो, मृत्यु का तांडव हो, और तीसरा नेत्र, तिनकों से बने साम्राज्य को भस्म कर दे.

डरता हूं मैं…तुम भी डरो. हम सब डरें क्योंकि तिनकों से बने अत्याचार के साम्राज्य के बीच ही कहीं तुम्हारा और मेरा घरौंदा भी है और शिव का ज्वाल रोकना कठिन है. शिव का क्रोध असीमित है. शिव से बड़ा काल अभी तक कल्पित नहीं हुआ. दौर पलट रहा है. शिव करीब हैं तो अपने कर्म से डरो, उसके फल से डरो. काल के क्रम से डरो. महाकाल के न्याय से डरो.

निश्चित तौर पर भारत के संसद पर कब्जा जमाये ब्राह्मणवादियों के झुंडों पर संसद में शिव के रुप में राहुल गांधी के हाथों जिस तरह बुद्ध का दर्शन – समानता, बंधुत्व, स्वतंत्रता – का नारा बुलंद हुआ है, वह एक लम्बे डग के तौर पर याद किया जायेगा.

Read Also –

RSS मूर्खों और कट्टरपंथियों का जमावड़ा
CAA-NRC के विरोध के बीच जारी RSS निर्मित भारत का नया ‘संविधान’ का प्रारूप
मोदी का ‘ट्रेलर’ देख भारत की नागरिकता छोड़कर औने-पौने भाग रहे हैं लोग, फिल्म तो अभी बांकी है
मोदी ‘परमात्मा’ के एजेंट है, तो उसी का रहे, हमारा पीछा छोड़ें, हमें अपना प्रधानमंत्री चुनने दें
सरल तरीक़े से समझें मोदी के विकास का मतलब 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-Pay
G-Pay
Previous Post

गुलाम बनाये जा रहे हैं भारतीय युवा, कोचिंग ही नहीं विदेशी नौकरी के झांसे में भी फंसे हैं

Next Post

संसद में राष्ट्रपति का अभिभाषण : नहीं नहीं राष्ट्रपतिजी, यह नहीं

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

संसद में राष्ट्रपति का अभिभाषण : नहीं नहीं राष्ट्रपतिजी, यह नहीं

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

बिना रोडमैप के लॉक डाउन बढ़ाना खुदकुशी होगा

May 2, 2020

महामानव पर ‘गर्व’ के दौर में ‘अर्बन नक्सल’

October 16, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.