Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सीखने के लिए आप किस चरित्र को चुनते हैं, आपका चयन है…

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 28, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
सीखने के लिए आप किस चरित्र को चुनते हैं, आपका चयन है...
सीखने के लिए आप किस चरित्र को चुनते हैं, आपका चयन है…

तो एक दिन लैपटॉप खोला…ब्लैंक वर्ड फाइल दी और बेटे को कहा – बेटा, हेल्प मि टू इंप्रूव. लिस्ट बनाकर दो, मेरी वह 10 आदतें जो तुम्हें सख्त नापसंद है. ऐसी आदतें जो तुम्हारे बाप में देखकर शर्म आती हो, जिन्हें मुझे तुरन्त बदल लेनी चाहिए.

तब वो शायद 8th में था. मैं अब तक खुशकिस्मत रहा हूं कि बढ़ते बच्चे के फर्स्ट रेबेलियन का पहला शिकार नहीं बना हूं. यह ज्यादातर बापों का शाप है, पर वह काफी हद तक मुझे आइडोलाइज करता है. बातें सुनता है, मानता है, सम्मान करता है.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

तो सवाल सुनकर स्तम्भित बैठा रहा. सोचता रहा. लगभग जबरजस्ती करने पर कुछ लिखा. पहला था – स्मोकिंग, फिर स्वेयर वर्ड्स का इस्तेमाल, एक दो और…थम गया.

अब तक मैं वॉच कर रहा था तो फ्रीडम देने के लिए उठ गया. बीस मिनट बाद लौटा. एक दो हल्के फुल्के पॉइंट्स उसने और लिखे थे. पर अब उससे हो नहीं रहा था. लिख क्यों नहीं रहे ? – मैनें पूछा.

जवाब में आंसू डबडबाने लगे. बड़ा इमोशनल था. और हो नहीं रहा था उससे. बुराइयां तो मुझमें और भी हैं मुझमें लेकिन एक्सरसाइज का पर्पज पूरा हो चुका था. ठीक, इतना काफी है. अब अगला काम करो. इसमें वो बुराइयां रेड मार्क करो, जो तुम कॉपी करते हो.

स्वयेयर वर्ड्स मार्क हुआ. कुछेक और…पर्पज तो वही था. गालियां देने की शिकायत आयी थी. खुद गालियां देता हूं, बेटे को क्या ही डांटता. गांधी तो हूं नहीं की गुड़ छोडने की सलाह देने के पहले, खुद गुड़ खाना छोड़ दूं. और गालियां, यूजफुल टूल है, ऐसा मानता हूं. सो यह तरीका निकाला था.

मैंने कहा-मेरे कई गुरु हैं. कुछ जीवित है, कुछ नही हैं. कुछ से कभी मिला नहीं बस सुना, और पढा है. कोई भी परिपूर्ण नहीं. अपनी अपनी बुराइयां है. किसी को शत प्रतिशत आइडोलाइज नहीं करो. मुझे भी नहीं. अच्छा, बेहतरीन ग्रहण करो. बुरा छोड़ दो. और तुम पाओगे की हरेक आदमी से कुछ सीखा जा सकता है.

बस बैड सेल्फ को इग्नोर करो, भला सीख लो. अपना विवेक, अपना विश्लेषण…सदा जागृत रखो.

थरूर पर पोस्ट लिखी. लोग आ गए – ठरकी है !!! ठीक है भई, होगा. मत सीखो ठरक…बाकी सीख लो.

गांधी, नेहरू, बुद्ध, राम, कृष्ण.. कौन सा चरित्र हैं, जिसमें कुछ बुराई खोज न निकालोगे. अगर यह नकार, किसी एक बिंदु पर, क्या सम्पूर्ण दैवत्व को प्रदूषित कर देती, तो मानवता उन्हें याद क्यों करती ? यह आपका नजरिया है, जूते के छेद से दुनिया देखोगे, तो छेद बड़ा, दुनिया छोटी लगेगी. श्वेत व्यक्तित्व में श्याम धब्बे मिलेंगे. श्याम चरित्र में धवल धब्बे.

हर बुरे में अच्छा है कुछ, हर अच्छे में कुछ बुरा. हंस की तरह श्वेत मोती चुग लीजिए, हलाहल को छोड़ दीजिए. सम्भव है, जो हलाहल समझ रहे हों, अमृत हो. तो जब मैच्योर जो जाओ, आकर बटोर लेना.

सीखने के लिए आप किस चरित्र को चुनते हैं, आपका चयन है. और यह चयन आपके व्यक्तित्व का मिरर है, जिनके क्रेडेंशियल प्रूवन हों, उन पर पढ़ना, लिखना, बोलना, सोसायटी के लिए जरूरी है ताकि विवेक पैदा हो. बुरे-भले की समझ बने. यह मुक्त कंठ प्रशंसा है, चापलूसी नहीं.

चापलूसी उसकी होती है, जो आपका कुछ बिगाड़ सकता है. जो पॉवर में हो, जिसका भय हो, जो मर चुका, जिसका करियर खात्मे पर है, जिसके पास पॉवर नहीं, जो किसी कुछ बिगाड़ सकता नहीं, तो गांधी, नेहरू, कृष्ण, राम के गुणों का बखान चापलूसी की श्रेणी में नहीं आता. थरूर या विपक्ष में बैठे राहुल की बात भी इसमें शामिल नहीं.

हां, जो सत्ता में बैठा है, जिसके हाथ कोड़ा है, जेल है, बांटने को राशन और प्रति कमेंट 2 रुपये है, उसका गुणगान अवश्य चापलूसी है. क्योंकि इसका कारक भय है. सत्ता से एसोसिएट होकर पॉवरफुल फील करने की ललक है.

नीच कर्म की पराकाष्ठा यह है कि आप मृत व्यक्तियों पर बुराई का आरोप करते हैं, जो खुद को डिफेंड करने नहीं आ सकता. जो आपकी कुशिक्षा से उत्पन्न भ्रांतियों का जवाब नहीं दे सकता. जो जिन्हें सत्य मालूम है, वे लिखें, बोलें, और जवाब दें.

नेशनल हीरोज, ऊंचे गुण और किरदार वालों पर जमी कीचड़ की सतह साफ करें. यह दौर की जरूरत है. सबसे बड़ी समाजसेवा है. राष्ट्र धर्म है. वरना आने वाले दौर में इस देश में गांधी, बुद्ध, नेहरू, अंबेडकर, सरदार, मनमोहन और थरूर पैदा नहीं होंगे. क्योंकि सड़कों पर सावरकर, श्यामू, दीनू, मोदी और गोडसे की मूरतें को देखकर आपके बच्चे वही बनना चाहेंगे. वह इस महान देश के गर्त में गिरने का दिन होगा.

  • मनीष सिंह

Read Also –

सिनेमा, क्रिकेट और राजनीति आधुनिक युवाओं के आदर्श
भारत की क्रांति के आदर्श नेता व भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य कॉ. अक्किराजू हरगोपाल (साकेत) एवं उनके एकमात्र पुत्र ‘मुन्ना’ की शहादत

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-Pay
G-Pay
Previous Post

पुलिस कब सुधरेगी, यह कोई आरोप नहीं है, टिप्पणी है

Next Post

आखिरी वजूद पर सिमटता यूक्रेन : यूक्रेनी सेना का रूसी क्षेत्र कुर्स्क पर कब्जे का सच और जेलेंस्की का युद्ध बिजनेस

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

आखिरी वजूद पर सिमटता यूक्रेन : यूक्रेनी सेना का रूसी क्षेत्र कुर्स्क पर कब्जे का सच और जेलेंस्की का युद्ध बिजनेस

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मैं भी काफिर, तू भी काफिर

August 2, 2024

संसदीय चुनावों के रणकौशलात्मक इस्तेमाल की आड़ में क्रांतिकारी कार्यों को तिलांजलि दे चुके कम्युनिस्ट संगठनों के संबंध में कुछ बातें

January 24, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.