Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

जहां अन्याय है, वहां शांति संभव ही नहीं है !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 24, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
सारांश : यह लेख न्याय और शांति के बीच के संबंध पर केंद्रित है. लेख में कहा गया है कि जहां अन्याय होता है, वहां शांति संभव नहीं है. अन्याय और शांति एक दूसरे के विपरीत हैं. जब तक अन्याय होता है, तब तक शांति नहीं हो सकती है. लेख में यह भी कहा गया है कि अन्याय को दूर करने के लिए हमें एकजुट होना चाहिए और न्याय के लिए लड़ना चाहिए. हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए और अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए. कुल मिलाकर, यह लेख हमें अन्याय के खिलाफ लड़ने और न्याय के लिए एकजुट होने के लिए प्रेरित करता है. यह हमें यह भी याद दिलाता है कि जहां अन्याय होता है, वहां शांति संभव नहीं है.
जहां अन्याय है, वहां शांति संभव ही नहीं है !
जहां अन्याय है, वहां शांति संभव ही नहीं है !
हिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ताहिमांशु कुमार

दो ज़िले हैं. एक ज़िले में बहुत सारे बड़े उद्योग हैं और दूसरे ज़िले में कोई भी बड़ा उद्योग नहीं है. तो आप कौन से ज़िले को विकसित जिला कहेंगे ? बेशक आप उस ज़िले को ही विकसित कहेंगे, जिसमें बहुत सारे बड़े उद्योग लगे हुए हैं.

अच्छा ये बताइये कि बड़ा उद्योग कौन लगाता है ? गरीब आदमी या अमीर आदमी ? आप कहेंगे कि अमीर आदमी ही बड़ा उद्योग लगाता है. अच्छा ये बताइये कि बड़ा उद्योग लगाने के लिए ज़मीन किसकी ली जाती है ? अमीर आदमी की या गरीब आदमी की ?

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

आप कहेंगे कि बड़ा उद्योग लगाने के लिए ज़मीन तो गरीब की ही ली जाती है. तो आपके विकास का मतलब हुआ कि गरीब से ले लो और अमीर को दे दो. तो इसे आप कहते हैं विकास !

अच्छा ये बताइये कि बड़ा उद्योग लगाने के लिए जब गरीब की ज़मीन ली जानी होती है, तो क्या गरीब प्रेम से अपनी ज़मीन दे देता है ? नहीं, गरीब प्रेम से अपनी ज़मीन नहीं देता है. गरीब अपनी ज़मीन छीनने का विरोध करता है. फिर क्या होता है ?

सरकार गरीब के विरोध को दबाने के लिए पुलिस को भेजती है. पुलिस जाकर गरीब को प्रेम से समझाती है क्या ? नहीं, पुलिस गरीब को पीटती है. पुलिस गरीब की झोंपड़ी तोड़ देती है. पुलिस गरीब को जेल में डाल देती है. पुलिस गरीब को गोली मार देती है और ज़मीन छीन ली जाती है. और गरीब की वह ज़मीन अमीर को दे दी जाती है.

तो अमीर को और भी अमीर बनाने के लिए गरीब को पीट कर उसके पास जो कुछ है, उसे छीन लिया जाता है और उसे अमीर को दे दिया जाता है. यानी बंदूक के दम पर गरीब से छीन लो और दांत दिखाते हुए उसे अमीर को सौंप दो. इसे आप कहते हैं – न्याय और लोकतंत्र.

अच्छा ये भी बताइये हम सब गंदगी करते हैं लेकिन खास जाति के लोग उस गंदगी को साफ़ करते हैं. तो गंदगी करने वाले अच्छे या सफाई करने वाले अच्छे ? आप कहेंगे सफाई करने वाले अच्छे. क्या हम सफाई करने वाली जाति के लोगों को अच्छा मानते हैं ? नहीं जी, सबसे नीचा मानते हैं.

मतलब असल में आप गंदगी करने वाले को बड़ा मानते हैं और सफाई करने वाले को नीच मानते हैं. तो ये है आपकी संस्कृति
जिसे आप विश्व की सबसे महान संस्कृति भी कहते हैं.

आप खुद ही ध्यान से देखिये इस तरह के विकास से, इस तरह के लोकतंत्र और न्याय से और इस तरह की संस्कृति से शांति और समानता संभव है क्या ?

जनाब आपके इस विकास, इस लोकतंत्र, आपके इस न्याय और आपकी इस संस्कृति में से सिर्फ असंतोष और अशांति ही निकल सकती है लेकिन आप सोचते हैं आप पुलिस के दम पर शांति ले आयेंगे. तो जनाब आप ऐसा कभी कर ही नहीं पायेंगे.

आप करोड़ों कड़ी मेहनत करने वाले लोगों को गरीब बनाए हुए हैं. वो मेहनतकश जब भी आवाज़ उठाते हैं, आप पुलिस की बंदूक और जेलों के दम पर उनकी आवाज़ को कुचल देते हैं. इसलिए आप हमेशा पुलिस और फौज के गुण गाते हैं. इसीलिए आपकी जेलें गरीबों से भरी हुई हैं.

असल में तो आपको पता है. आप आज अन्याय और दमन के दम पर ही मज़े में हैं. आप मेहनत नहीं करते लेकिन कार में घूमते हैं. जिस दिन गरीब की ज़मीन छीनने के लिए ये पुलिस गोली नहीं चलाएगी, उस दिन आपकी अमीरी खतम हो जायेगी.

जिस दिन सफाई करने वाले को इज्ज़त मिलनी शुरू हो जायेगी, उस दिन गंदगी करने वाले आप अपने सम्मान के सिंहासन से नीचे लुढक जायेंगे. इसलिए ही आपके राष्ट्र का राष्ट्रपति अपनी ज़मीन बचाने की कोशिश करने वाली महिला सोनी सोरी के गुप्तांगों में पत्थर भरने वाले पुलिस अधिकारी को वीरता पुरस्कार देता है.

लेकिन संविधान ने कहा था कि राज्य का कर्तव्य होगा कि वह आर्थिक समानता लाएगा. यानी सरकार गरीब की ज़मीन छीन कर अमीर को नहीं दे सकती. संविधान ने कहा था सबका सम्मान बराबर होगा. यानी सफाई करने वाले को भी आपके बराबर सम्मानित माना जाएगा. लेकिन आप अभी भी संविधान की बात मानने को तैयार ही नहीं हैं.

आप देश को मूर्ख बनाने के लिए कहते हैं कि हम संविधान में एक बार फिर से आस्था व्यक्त करते हैं लेकिन आपने एक भी जगह संविधान की बात मानने की कोई कोशिश ही नहीं की है.

लोग इस ढोंग के कारण बहुत गुस्से में हैं. हम लोगों के गुस्से को और भी भड़कायेंगे ताकि करोड़ों लोग संविधान को ज़मीन पर लागू कर लें. यह दमनकारी राज्य, यह ढोंगी न्याय व्यवस्था, यह संस्कृति, एक दिन के लिए भी बचाए जाने के योग्य नहीं है. इसका समूल नाश ही नए समाज को बनाने का रास्ता खोल सकता है. जहां अन्याय है, वहां शांति संभव ही नहीं है.

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-pay
Previous Post

भारत का फासीवाद और कांग्रेस…

Next Post

खुदाई

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

खुदाई

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून : राष्ट्र की सुरक्षा के नाम पर …

September 5, 2020

विदेशी निवेश के भारत आने में मोदी का फ्लॉप शो

May 23, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.