Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

बस्तर में 12 नहीं 18 माओवादी गुरिल्ले हुए हैं शहीद, मार डाले गये 5 पुलिस, दर्जनों घायल

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 19, 2025
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
बस्तर में 12 नहीं 18 माओवादी गुरिल्ले हुए हैं शहीद, मार डाले गये 5 पुलिस, दर्जनों घायल
बस्तर में 12 नहीं 18 माओवादी गुरिल्ले हुए हैं शहीद, मार डाले गये 5 पुलिस, दर्जनों घायल

केन्द्र में हिन्दुत्ववादी दक्षिणपंथी फासीवादी मोदी सत्ता ने दण्डकारण्य में जनताना सरकार के ख़िलाफ़ भीषण युद्ध छेड़ दिया है. यही कारण है कि दण्डकारण्य आज भारत का सबसे युद्ध ग्रस्त क्षेत्र बन गया है, जहां दो सत्ता के बीच जमकर भिड़ंत हो रही है और इस भीषण युद्ध में लोगों की खून बह रही है.

ये दो सत्ता है भारत की फासीवादी मोदी सत्ता जो दण्डकारण्य के आदिवासियों को खदेड़़कर उनके प्राकृतिक संसाधनों – जल, जंगल, जमीन – को लूटकर कॉरपोरेट घरानों के हाथों में सौंप देने के लिए कृतसंकल्पित है और आये दिन लोगों का खून बहा रहा है. तो वही दूसरी सत्ता है माओवादियों के ‘जनताना सरकार’ की सत्ता, जो आदिवासियों के प्राकृतिक संसाधनों समेत उनके जमीन, आबरू को बचाने के लिए कृतसंकल्पित है, और अपनी शहादतें दे रहे हैं. इसी जिच में यह भीषण लड़ाई जारी है.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

भारत की फासीवादी मोदी सत्ता देश भर में खून की होली खेल रहा है. देश भर के किसानों, मजदूरों, युवाओं, औरतों के साथ आये दिन दुष्कर्मों को अंजाम दे रहा है. इन सभी दुष्कर्मों के खिलाफ अगर कोई मजबूती से खड़ा है तो वह माओवादी ही है. यह माओवादी ही वह ताकत है जो देश भर के तमाम उत्पीडित ताकतों में असीम साहस का संचार कर रहा है.

बहरहाल, देश की जनता को लुटने और बचाने वाले के बीच के भीषण युद्ध का केन्द्र दण्डकारण्य बन गया है. खबर के अनुसार पुलिसिया मुखबिरों के खबर के बाद माओवादियों के गुरिल्लों को घेरने हजारों की फौज लेकर पुलिसिया गिरोह जा पहुंचा और भीषण लड़ाई चली. इस लड़ाई के बाद जो एक चीज नजर आया वह था अहले सुबह औने-पौने गिरता पड़ता भागता पुलिसिया गिरोह, जो अपने साथ लेकर आया था 12 शहीद गुरिल्लों का शव और लज्जा और झूठ का नक़ाब.

और इस झूठ से नक़ाब उठाया है माओवादियों के द्वारा जारी प्रेस नोट में. 18 जनवरी को जारी यह प्रेस नोट भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी ) का दक्षिण बस्तर डिविजनल कमेटी के सचिव गंगा ने जारी किया है. इस प्रेस नोट में माओवादी बताते है – बीजापुर जिला उसूर थाना अंतर्गत 6 जनवरी को पुजारी कांकेर गांव में हुए सरकारी हत्याकांड और निहत्थे गांव वालों के ऊपर मिसाइल से हमले का विरोध करो. और कामरेड दामोदर (एससीएम), हुंगी (पीपीसीएम), देवे (पीपीसीएम), जोगा (पीपीसीएम), नरसिंह राव (पीपीसीएम) और भाकपा माओवादी के हमारे अन्य साथी अमर रहें.

‘पिछले दिनों बीजापुर जिले के पुजारी कांकेर क्षेत्र में राज्य और केंद्र की फासीवादी सरकार और सुरक्षा बलों ने ‘ऑपरेशन’ के नाम पर क्रूर और अमानवीय दमनकारी अभियान चलाया. इस अभियान का असली उद्देश्य पूंजीवादी राज्यसत्ता के इशारे पर बस्तर की प्राकृतिक संपदाओं की लूट सुनिश्चित करना और आदिवासियों को उनकी जमीन-जंगल से उजाड़ना है.

’इस अभियान में हमारे संगठन ने 8 बहादुर साथियों को खो दिया. इन वीरों ने अंतिम सांस तक पूंजीवादी लूट और शोषण के खिलाफ संघर्ष किया. विशेष रूप से कामरेड बड़े चोखा राव (दामोदर दादा) ने बहादुरी का प्रदर्शन किया और लड़ते हुए शहीद हो गए. उनकी मृत्यु से संगठन को अपूरणीय क्षति हुई है, लेकिन उनकी क्रांतिकारी विरासत हजारों नए साथियों को प्रेरित करेगी.

’हमारी जवाबी कार्यवाही में फ़ोर्स के लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा, जिसमें उनके 5 लोग मारे गए और कई दर्जन गंभीर रूप से घायल हुए. फ़ोर्स ने अपनी असफलता छिपाने के लिए निर्दोष ग्रामीणों पर अत्याचार किया. कई मासूम ग्रामीणों को जबरन जंगलों से खींचकर ले जाया गया और उनको मारा पीटा. कई ग्रामीणों को नक्सली बता कर फ़ोर्स वाले अपने साथ भी ले गए हैं. यहां तक कि अपनी नाकामी छुपाने के लिए मोटरसाइकिलों और ट्रैक्टरों को आग लगा दिया.

’इस ‘ऑपरेशन’ में 5000 से अधिक हिंदुत्ववादी फासीवादी सैनिक दंतेवाड़ा उप महानिरीक्षक कमलोशन कश्यप और बीजापुर एसपी जितेंद्र यादव के नेतृत्व में, अत्याधुनिक हथियारों से लैस होकर, हमारे साथियों के खिलाफ उतरे. लेकिन हमारी क्रांतिकारी ताकतों ने उन्हें कड़ा जवाब दिया.

’बस्तर अब देश का सबसे अधिक सैन्यीकृत क्षेत्र बन चुका है, जहां सरकार प्राकृतिक संसाधनों की लूट के लिए आदिवासियों के खिलाफ युद्ध छेड़े हुए है. इस तथाकथित ‘नक्सल उन्मूलन’ अभियान के तहत आदिवासी समुदायों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है.

‘हम सभी प्रगतिशील बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और जनसंगठनों से अपील करते हैं कि वे इन अमानवीय अत्याचारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उजागर करें. यह समय अन्याय के खिलाफ खड़े होने का है. शोषण के खिलाफ संघर्ष जिंदाबाद ! क्रांतिकारी अविवादन…’.

माओवादियों और पुलिसिया गुंडों के बीच जारी इस मुठभेड़ में जहां माओवादियों के 18 गुरिल्ले शहीद हुए हैं, वहीं 5 पुलिसिया गुंडे भी मारा गया और दर्जनों घायल हुआ है. यही कारण है कि पुलिसिया गुंडे सुबह मूंह अंधेरे भाग खड़ा हुआ और अपने गुंडों की मौत पर जुवान सिल लिया. उसको अपने 5 गुंडों के मरने और दर्जनों गुंडों के घायल होने की बात कबूलने का साहस भी नहीं है.

आखिर सच कबूलने के लिए भी सच के साथ होना जरूरी होता है. झूठ की किश्ती पर सवार होने वाले भाड़े के गुंडों में सच कबूलने का साहस भी नहीं हो सकता. माओवादी अपने 18 गुरिल्लों की शहादत को कबूलता ही इसलिए है क्योंकि वह सच के साथ खड़ा है और अपने शहीदों का सम्मान करना जानता है. क्योंकि वे देश के मेहनतकश अवाम की आज़ादी की क़ीमत चुका रहे हैं, जो सिक्कों से नहीं खून से दी जाती है.

Read Also –

माओवादियों के बटालियन से मुठभेड़, 12 की मौत और आजादी की कीमत
सशस्त्र विद्रोह द्वारा देश का निर्माण कैसे होता है और कूटनीति क्या है ?

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate

Previous Post

यह कुंभ है, महाकुंभ नहीं है योगी-मोदी

Next Post

कहानी के बाहर नहीं होता कहानी का शिल्प

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

कहानी के बाहर नहीं होता कहानी का शिल्प

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

उड़नतश्तरियों की दहशत और वैज्ञानिक शोधों के जीरो नतीजे

August 19, 2024

देश, देशभक्ति और तिरंगा

January 31, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.