Tuesday, June 9, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

क्या दिल्ली में भी बीजेपी की सीटों की संख्या आश्चर्य जनक रूप से बढ़ने जा रही है ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 11, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

क्या दिल्ली में भी बीजेपी की सीटों की संख्या आश्चर्य जनक रूप से बढ़ने जा रही है ?

अत्याधुनिक वोटिंग प्रणाली ईवीएम के बावजूद दिल्ली विधानसभा चुनाव का परिणाम 11 फरवरी को घोषित किया जायेगा. आखिर इतना अधिक समय क्यों लगाया जा रहा है ? न केवल मतदान का परिणाम ही, बल्कि मतदान प्रतिशत तक बताने में चुनाव आयोग ने 24 घंटे से अधिक का वक्त लिया है. चुनाव आयोग ने मतदान प्रतिशत भी 24 घंटे के बाद तब बताया जब चारो ओर से लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठाया जाने लगा.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

एक्जिट पोलों में दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी को काफी (लगभग 68 सीटें) देने के बीच भाजपा के दिल्ली ईकाई अध्यक्ष मनोज तिवारी खुले तौर पर भाजपा को 45 सीटों के साथ सरकार बनाने का दावा पेश कर रहे हैं. मनोज तिवारी का यह दावा महज कीमियागिरी हो, ऐसा भी नहीं लगता. यह अमित शाह और चुनाव आयोग की मिलीभगत का परिणाम भी हो सकता है. मनोज तिवारी ने एक पेपर पर चुनाव परिणाम को इस प्रकार बताया है –

मनोज तिवारी का यह मतगणना परिणाम चुनाव आयोग के पूर्व के संदिग्ध रवैये पर मुहर लगा रहा है, जहां वह लोकसभा चुनाव में भी मोदी के हिसाब से चल रहा था, सारे विपक्षी दलों के लाख विरोध के बावजूद. पत्रकार गिरीश मालवीय चुनाव आयोग के इन्हीं संदिग्ध रवैैये को यहां उठा रहे हैं –

बहुत से मित्र यह आश्चर्य प्रकट कर रहे हैं कि चुनाव आयोग बार-बार दिल्ली के मतदान के आंंकड़े बढ़ाए चला जा रहा है और अभी तक मतों का कुल प्रतिशत आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया है !

मित्र नवनीत चतुर्वेदी बता रहे हैं कि कल शाम 5 बजे चुनाव आयोग की प्रवक्ता शेफाली शरण ट्वीट करती हैं कि दिल्ली में कुल वोटिंग 44.52% हुआ है. मतदान खत्म होने के बाद शाम को यह खबर आती है कि मतदान 56% के लगभग हुआ है. सुधीर चौधरी जिनका DNA ही खराब है, वह दिल्ली की पब्लिक को गरियाना शुरू कर देते हैं.

रात में चुनाव आयोग मतदान प्रतिशत का आंंकड़े फिर बदल जाता है. अब कहा जाता है कि लास्ट में वोटिंग खत्म होते-होते कुल वोटिंग 61.75% की हो गई है, अर्थात सिर्फ अगले डेढ़ घण्टे में करीब 17% वोट करिश्मे की तरह बढ़ जाते है और वोटिंग पिछली बार से महज 5 या 6 प्रतिशत ही कम होती है. तब भी सुधीर चौधरी दिल्ली की जनता को वोट नहींं करने के लिए देशद्रोही बताते हैं.

मित्र नवनीत इसका कारण स्प्ष्ट करते हुए बताते हैं कि कल शाम को अचानक आइटी सेल प्रमुख अमित मालवीय का ट्वीट आता है कि हमारे कार्यकर्ताओ ने अंतिम समय के लास्ट घण्टे में जनता को प्रेरित किया और घर से निकल कर बूथ तक भेजा ओर इससे वोटिंग बढ़ गई,

आज दोपहर तक भी चुनाव आयोग फाइनल फिगर नहीं दे रहा है जबकि मतदान की अगली सुबह तक फाइनल आँकड़े आ जाते हैं.

इस बात से मुझे अपनी एक पुरानी पोस्ट याद आयी दरअसल 29 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में नौ राज्यों की 72 लोकसभा सीटों पर वोट डाले गए और रात 9:39 तक 63.16 फ़ीसदी मतदान दर्ज किया गया था लेकिन जब अगले दिन इलेक्शन कमीशन की वोटर टर्नआउट ऐप’ पर डेटा अपडेट हुआ तो सिर्फ 2 राज्यों में तस्वीरे पूरी तरह से बदल चुकी थी.

ये 2 राज्य है उड़ीसा और पश्चिम बंगाल. इन दोनों राज्यों में मतदान का प्रतिशत अचानक से लगभग 7 से 8 प्रतिशत बढ़ गया. ओडिशा में यह 64.24% से बढ़कर सीधे 72.89% हो गया और पश्चिम बंगाल में 76.72% से सीधा बढ़कर 82.77% हो गया. बाकी राज्यों में भी थोड़ी घट बढ़ हुई थी जैसे महाराष्ट्र में 55.86% से 56.61% हुआ है, राजस्थान में 67.91% से 68.16% हुआ लेकिन इन दो राज्यों में जहांं बीजेपी की स्थिति सबसे कमजोर थी और सारी ताकत उसने इन्ही 2 राज्यों पर लगा रखी थी, उन्हीं 2 राज्यों के मतदान के आंकड़ों में इतना बड़ा मेजर चेंज आ गया. और जब 2019 में लोकसभा के परिणाम आए तब इन राज्यों में बीजेपी को 2014 की तुलना में काफी अधिक सीट मिली.

दिल्ली तो पूरी तरह से अरबन इलाका है. बंगाल और उड़ीसा के बारे में तो यह तर्क भी दिया जा रहा था कि सुदूर इलाकों से रिपोर्ट देरी से आई इसलिए ऐसा हुआ. लेकिन दिल्ली में तो ऐसी कोई दिक्कत नहींं थी तो मतदान का अचानक से बढ़ा हुआ प्रतिशत कैसे दिखाया जा रहा है ? क्या दिल्ली में भी बीजेपी की सीटों की संख्या आश्चर्य जनक रूप से बढ़ने जा रही है ? चुनाव आयोग की विश्वसनीयता कटघरे में है.

Read Also –

दिल्ली चुनाव का देवासुर संग्राम
दिल्ली विधानसभा चुनाव : अपने और अपने बच्चों के भविष्य खातिर भाजपा-कांग्रेस का बहिष्कार करें
दिल्ली विधानसभा चुनाव में गूंजता हिंसा का पाठ 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

‘अगर देश की सुरक्षा यही होती है तो हमें देश की सुरक्षा से ख़तरा है.’

Next Post

हिटलरी और संघी फासीवाद का अंतर

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

हिटलरी और संघी फासीवाद का अंतर

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

ईंश निंदा कानून : ‘हम क्या बन गए हैं ?’

December 4, 2021

डार्विन, जिसने सारी पुरानी मान्यता को ध्वस्त कर दिया

December 6, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.