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सीपीआई माओवादी के शीर्ष नेता ‘माड़वी हिडमा’ फर्जी मुठभेड़ में शहीद और सीपीआई माओवादी के महासचिव देवजी समेत 31 अन्य पुलिस गिरफ्त में

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 18, 2025
in गेस्ट ब्लॉग
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सीपीआई माओवादी के शीर्ष माओवादी नेता 'माड़वी हिडमा' फर्जी मुठभेड़ में शहीद और सीपीआई माओवादी के महासचिव देवजी समेत 22 अन्य पुलिस गिरफ्त में
सीपीआई माओवादी के शीर्ष नेता ‘माड़वी हिडमा’ फर्जी मुठभेड़ में शहीद और सीपीआई माओवादी के महासचिव देवजी समेत 31 अन्य पुलिस गिरफ्त में

माड़वी हिडमा, जिसे कभी-कभी मांडवी हिडमा, हिडमालू या संतोष के नाम से भी जाना जाता था, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सबसे शक्तिशाली और गुप्त गुरिल्ला नेताओं में से एक थे. वह छत्तीसगढ़ के दक्षिण सुकुमा जिले के पुरबती गांव के मुरिया आदिवासी समुदाय से था.

वह छोटी उम्र में ही माओवादी आंदोलन में शामिल हो गया, दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की और जल्द ही एक गुरिल्ला कैडर के रूप में जाना जाने लगा. पहाड़ी और घने जंगलों में घूमने, बिना किसी की नज़र में आए अपनी स्थिति बदलने और सुरक्षा बलों की गतिविधियों का अनुमान लगाने की उसकी क्षमता ने उसे जल्द ही संगठन के उच्च पदों पर पहुंचा दिया.

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वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की बटालियन नंबर 1 के कमांडर थे और बाद में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) के एक प्रमुख सदस्य और पीएलजीए प्रमुख बने. वह केंद्रीय समिति के सबसे युवा सदस्यों में से एक के रूप में भी उभरे.

2025 में, उन्हें डीकेएसजेडसी का सचिव बनाया गया, जिसने उन्हें दंडकारण्य क्षेत्र में समग्र गुरिल्ला रणनीति, संचालन और प्रतिरोध योजना के केंद्र में ला खड़ा किया. सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, उनके पास चार-स्तरीय सुरक्षा घेरा था और उनके चारों ओर एक बेहद भरोसेमंद, उच्च प्रशिक्षित गुरिल्ला कैडर था. कुछ रिपोर्टों का दावा है कि उन्होंने फिलीपींस में भी गुरिल्ला प्रशिक्षण प्राप्त किया था.

सरकारी सूत्रों के अनुसार, माधवी हिडमा ने राज्य के खिलाफ कई घातक और बड़े हमलों की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. इनमें 2010 का तारमेटला हमला, जिसमें 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे, 2013 का झीरम बेस (दरभा) हमला, जिसमें कांग्रेस के शीर्ष नेता मारे गए थे, और 2017 का बुर्कापाल हमला, जिसमें 24 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे, शामिल हैं.

विभिन्न रिपोर्टों में उल्लेख किया गया है कि वह कम से कम 26 बड़े हमलों की योजना बनाने में शामिल थे. भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उसके सिर पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, और अन्य राज्यों और एजेंसियों ने भी अलग-अलग इनाम घोषित किए थे.

उनके नेतृत्व के दौरान, माओवादी ढांचे के भीतर एक मज़बूत संगठन बनाए रखने और सुरक्षा बलों के दबाव में लगातार अपने ठिकाने बदलने के बीच संतुलन बना रहा. 2024-25 में, विभिन्न रिपोर्टों से पता चला कि सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव, सिकुड़ती सीमाओं और आंतरिक नेतृत्व संकट के कारण हिडमा तेज़ी से चिड़चिड़े, सतर्क और गुप्तचर हो गए थे.

हाल ही में प्रकाशित कई समाचार रिपोर्टों के अनुसार, 18 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू (मेरेडुमिली वन क्षेत्र) जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में वह अपने छह साथियों के साथ मारे गये. उसकी पत्नी राजक्का भी उनमें शामिल थीं.

पर्यवेक्षकों के अनुसार, उसकी मृत्यु ने दंडकारण्य क्षेत्र के माओवादी नेतृत्व में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है. उनकी गुरिल्ला रणनीति, संचालन योजना कौशल और घने जंगलों में स्थित प्रतिरोध नेटवर्क ने उसे आधुनिक भारतीय माओवादी आंदोलन के सबसे चर्चित कमांडरों में से एक बना दिया है.

इसके साथ ही आंध्र प्रदेश से 31 माओवादी गिरफ्तार, जिसमें 4 महत्वपूर्ण माओवादी नेता हो सकते हैं. आंध्र प्रदेश में माओवादी संगठनों के खिलाफ एक बड़े अभियान में पुलिस ने एक साथ 31 माओवादियों को गिरफ्तार किया है. यह अभियान विजयवाड़ा और काकीनाडा जैसे दो शहरों में चलाया गया.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह अभियान आज सुबह मारेडुमिली इलाके में हुई मुठभेड़ में माओवादी केंद्रीय समिति के सदस्य माडवी हिडमा और उसकी पत्नी सहित छह लोगों के मारे जाने के बाद शुरू किया गया.

आंध्र प्रदेश के अतिरिक्त महानिदेशक महेश चंद्र लड्डा ने बताया कि गिरफ्तार लोगों में माओवादी शीर्ष नेता देव जी की सुरक्षा शाखा से जुड़े नौ सदस्य शामिल हैं. हालांकि, गिरफ्तार किए गए चार अहम माओवादी नेताओं की जानकारी की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. संबंधित जिलों के एसपी विस्तृत जानकारी जारी करेंगे.

हिडमा मुठभेड़ के राजनीतिक और सुरक्षा नतीजों के बीच, एक साथ 31 लोगों की गिरफ्तारी ने पूरे आंध्र प्रदेश में व्यापक चर्चा पैदा कर दी है. वहीं नागरिक अधिकार संघ, आंध्र प्रदेश के अध्यक्ष वेदांगी चिट्टीबाबू और सम्पादक चिलुका चंद्रशेखर ने एक विज्ञप्ति जारी कर बताया कि माओवादी नेता हिडमा और अन्य नेताओं की मुठभेड़ फर्जी है और गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने यातनाएं देने के बाद गोली मारकर हत्या की है.

उन्होंने बताया कि पिछले महीने की 28 तारीख को आंध्र प्रदेश के एक आश्रय गृह में रह रहे हिडमा और उसके साथियों को एक व्यक्ति द्वारा दी गई सूचना के आधार पर आंध्र प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. फिर उन्हें मारेडुमिली के जंगल में ले जाया गया और निहत्थे रहते हुए ही उनकी भयानक क्रूरता से हत्या कर दी गई.

नागरिक अधिकार संघ इस फर्जी मुठभेड़ की कड़ी निंदा करता है. इस तरह और भी कई निहत्थे लोगों के मारे जाने की आशंका है. इसलिए, उन्हें तुरंत अदालत में पेश किया जाना चाहिए. नागरिक अधिकार संघ मांग करता है कि इस हत्या को रोका जाए और सर्वोच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच कराई जाए. सार्वजनिक संगठन, लोकतंत्र समर्थक लोग – हर कोई इन क्रूर हत्याओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगा.

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