Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

घृणा की आग में जलता गुजरात

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 9, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

घृणा की आग में जलता गुजरात

गुजरात के कुछ हिस्सों से बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों पर अत्याचार की हृदय विदारक तस्वीरें देखने को मिली. उत्तर भारतियों के पलायन की खबरें लगातार आ रही हैं. उनकी बस्तियां जलाई जा रही हैं और घर फूंके जा रहे. ट्रेन भी मह्फूज़ नहीं.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

बताया जा रहा है कि एक 14 महीने की बच्ची के साथ हुए रेप की वारदात के बाद यह एक स्वतस्व्फुर्त घटना है जो कि कोई भी गैर-भक्त मानने को तैयार नहीं है.

2002 में गोधरा की घटना के बाद हुए सम्प्रदायिक दंगों के समर्थन में इसी तरह की दलीलें दी जाती थी और आज भी दी जाती है. दरअसल, अखलाक, पहलू खांं, नजीब की हत्या के बाद भी इसी प्रकार हत्या को न्यायोचित ठहराने का प्रयास किया गया. 80 के दशक में असम आंदोलन के समय या 90 के दशक में महाराष्ट्र में और हाल फिलहाल कर्नाटक में भी यही pattern रहा.

जो लोग मोदी जी की घृणित सम्प्रदायिक राजनीति के मत्थे सारा दोष मढ़कर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेते हैं, वे इस समस्या की जड़ तक पहुंच नहीं सकते.

ये सही है कि मोदी जी इसी घृणा की राजनीति की उपज हैं और इसे आगे बढ़ाने में उनका योगदान स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक ऐसा काला अध्याय है जिसे आने वाली पीढियांं न सिर्फ याद करेंगी वरन उसका दंश झेलने को अभिशप्त होंगी.

फिर भी बात यहीं पर खत्म नहीं होती. लोग पूछेंगे 80 में मोदी जी कहां थे ? कर्णाटक, महाराष्ट्र में मोदी जी कहां थे ? और सवाल वाजिब है.

दरअसल, इसके लिए भारत की राजनैतिक, अर्थिक और सामजिक संरचना को समझना होगा.

भारत एक राजनीतिक अस्तित्व बना पहली बार अंग्रजों के शासन काल में लेकिन स्वतंत्र भारत 117 रियासतों में बंटा हुआ एक भौगोलिक सत्य था. ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो विश्व में प्राचीन युग और मध्य युग में कोई भी इतना बड़ा भू भाग एक संप्रभु, राजनीतिक, समाजिक रूप से एक देश नहीं था.

19 वीं सदी में बनी राष्ट्र की अवधारणा रोमन साम्राज्य के दिनों की राष्ट्र की अवधारणा का विस्तार भर था, जिसके तहत एक भू-खंड में रहने वाली अर्थिक ताकतें, या पूंजी के वाहक एक-दूसरे के सहयोग के बिना जब अपने अस्तित्व पर खतरा मंडराते पाया तो एक आर्थिक consortium के तौर पर एक राष्ट्र अस्तित्व में आया. इस पूंजी की प्रतिस्पर्धा का फल दो विश्व युद्धों के रूप में मानवता को मिला.

आज की परमाणु सम्पन्न विश्व में तृतीय विश्व युद्ध की संभावना ना के बराबर है लेकिन अर्थिक गणित पर बने हुए राष्ट्र अपने पूंजीवादी अन्तरविरोधों के फलस्वरूप implode कर रहे हैं.

असम से लेकर गुजरात की ताजा घटनाओं के पीछे यही अन्तर विरोध सक्रिय है. भारत का एकांगी अर्थिक विकास vertical भी है और horizontal भी. वर्टिकल तौर पर विकास क्षेत्रीय संपन्नता को जन्म देता है और horizontal तौर पर अमीरी-गरीबी की खाई को.
उपरी तौर पर देश और समाज एक रहता है लेकिन अन्दर ही अन्दर ये लाखों टुकड़ोँ में बंटा रहता है और ज़रा-ज़रा सी बात या अनुकूल वातावरण पाकर यह बिखराव साफ़ दिख जाता है.

पूंजी का sectoral concentration गरीब इलाके के लोगों को अमीर इलाकों की तरफ स्वाभविक रूप से ढकेकता है. संपन्न इलाके के पूंजीपति पहले तो गरीब इलाकों से सस्ते श्रम के आयात को बढ़ावा अपने हित में देते हैं, फिर शुरु होती है तथाकथित भीतरी-बाहरी की लड़ाई.

दरअसल आयातित मजदूर जड़ विहीन proletariate होते हैं, जो सही राजनैतिक शिक्षा के अभाव में lumpenise भी हो जाते हैं. लेकिन यह दशा सार्वजनिक नहीं होती, व्यक्तिगत होती है. ठीक वैसे जैसे पूरा समाज सम्प्रदायिक घृणा का गुलाम नहीं होता या criminal नहीं होता, कुछ लोग होते हैं. इन तत्वों की करनी का फल पूरे समाज को भोगना पड़ता है.

दूसरी तरफ, तथाकथित भीतरी लोग सिकुड़ती आर्थिक ज़मीन पर तथाकथित बाहरी लोगों का कब्जा देख कर असन्तोष और गुस्से से भरे होते हैं. समाज बारूद के ढेर पर बैठे हुए उस बच्चे की तरह होता है जिसके परखच्चे ज़रा सी आग लगने पर उड़ना तय है.

यही अर्थिक विषमताएं घृणा और अविश्वास की राजनीती को जन्म देती है, जिसके उपज नरेंद्र मोदी हैं.

फिर भी मैं बताना चाहूंंगा कि स्वतंत्रता के बाद जिस तरह भारत की अर्थवयवस्था पूंजीपतियों और उनके दलालों के हाथों आ गई, उस process की स्वाभविक परिणति साम्प्रदायिकता, क्षेत्रीयता, जातिवाद और अमीरी-गरीबी के फर्क के सिवा और कुछ हो ही नहीं सकता था. हम पतन्नोशील पूंजीवाद के सबसे वीभत्स युग में जी रहे हैं और इसके लिए कई पीढियांं जिम्मेदार हैं.

आखिर में –

लम्हों ने खता की थी
सदियों ने सजा पाई है.

  • सुब्रतो चटर्जी

Read Also –

द ग्रेट बनाना रिपब्लिक ऑफ इंडिया
विश्वगुरू बनते भारत की पहचान : एबीवीपी के गुंडों से पैर छूकर मांफी मांगते गुरू
मोदी का गुजरात मॉडल : हत्या, चोरी, आर्थिक अपराध कर देश से भाग जाना है 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

मोदी सरकार का बिजली बिल में खतरनाक संशोधन

Next Post

चुनावी फायदा के लिए सेना का घृणित इस्तेमाल

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

चुनावी फायदा के लिए सेना का घृणित इस्तेमाल

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

देह

March 20, 2021

बिहार में भाजपा की जमीन तैयार करने में जुटा ‘बाबा’

May 17, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.