Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सशक्तिकरण का प्राथमिक शर्त है आर्म्स एक्ट कानून का खात्मा

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 22, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

सशक्तिकरण का प्राथमिक शर्त है आर्म्स एक्ट कानून का खात्मा

जिस राष्ट्र में एक पर्व विजयदशमी विशेष रूप से शस्त्र-पूजन के लिए हो, उस राष्ट्र में शस्त्र रखना एवं उसका निर्माण करना क़ानूनी रूप से अवैध है, क्या ये एक मजाक नहीं है ? इससे साफ़ है इस राष्ट्र में चल रहे नियम कानून एवं संविधान इस देश के नहीं हैं.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

ब्रिटिशों के संविधान और संसदीय व्यवस्था के साथ ही भारत जिन सबसे खतरनाक काले कानूनों को ढ़ो रहा है उनमें से एक है ’’Indian Arms Act 1878’’ जो ब्रिटिश डकैतों के तत्कालीन गिरोह सरगना Robert Lytton ने लागू किया था.

1857 में भारतीयों के साथ हुए युद्ध में (1857 विद्रोह गलत शब्द है) करारी हार के बाद जब ब्रिटिश पुनः भारत में मजबूत हुए तो उन्होंने सबसे महत्त्वपूर्ण काम भारतीयों को शस्त्रहीन करने का किया. घर-घर में शस्त्र ही भारतीयों का ताकत था, जिसके चलते ब्रिटिशों का 1857 में भारत के एक बड़े हिस्से से सफाया कर दिया गया था लेकिन Indian Arms Act 1878 लागू कर ब्रिटिशों ने भारतीयों को शस्त्र रखने और शस्त्र निर्माण करने से वंचित कर दिया जबकि ब्रिटिशों के लिए बनाना, रखना सब वैध था. यही कारण है कि किसी समय अमेरिका यूरोप को शस्त्र सप्लाई करने वाला देश आज छोटे-छोटे हथियारों के लिए रूस-अमेरिका पर निर्भर है.

मैकाले शिक्षा पद्धति से पढ़कर निकले मानसिक गुलाम जो कहते हैं, भारत सुई तक नहीं बना पाता था, उन्हें अमेरिका की सबसे पुरानी हथियार निर्माता कंपनी DuPont के ऐतिहासिक दस्तावेज खंगालने चाहिए जहां कंपनी खुद कहती है उसने 1802 में भारत से हथियार निर्माण के लिए Raw Materials Import करना शुरू किये थे, भारत से ही हथियार आयात करके DuPont उसे अमेरिका में बेचा करती थी.




Manhattan Project द्वारा अमेरिका के लिए परमाणु बम और हाइड्रोजन बम विकसित करने में योगदान देने वाली कंपनी  DuPont के डाक्यूमेंट्स को देखने पर हमें पता चलता है, 19वीं सदी तक दुनिया हथियार और गोला बारूदों के लिए भारत पर निर्भर थी.

भारत को पुनः संपन्न और सशक्त बनाने के लिए आवश्यक है भारत में शस्त्र निर्माण और शस्त्र रखने दोनों को वैध किया जाय, भारतीयों के दिमाग को मैकाले शिक्षा पद्धति ने ऐसा दूषित किया है, जब भी भारत में शस्त्र को वैध किये जाने की बात होती है तो मैकालेपुत्र यह तर्क देते हैं कि, ‘अगर हथियार रखना सबके लिए वैध कर दिया गया तो क्राइम बढ़ेगा.’

दुनिया के सबसे शांतिप्रिय देशों में से एक माने जाने वाले  Iceland में हर घर राइफल और माउजर मिल जाएगी, जहां क्राइम रेट लगभग जीरो (0.30) है. अपराध का कारण गलत शिक्षा प्रणाली, संविधान-कानून और व्यवस्थाएं हैं, हथियार नहीं, जो बदलने की जरूरत है उसमें बदलाव के बजाय कुतर्क करना आधुनिक शिक्षा का दोष है, जिसमें भी बदलाव की जरूरत है.

जो भी जागरूक वकील हों वो सुप्रीम कोर्ट में Indian Arms Act 1878 (Currently Arms Act, 1959) रद्द करने की याचिका लगायें और सुप्रीम कोर्ट से मांग करें कि, जिस तरह  सुप्रीम कोर्ट ने 377-497 जैसे ब्रिटिशों के काले कानून खत्म किये, उसी तरह Arms Act 1959 को भी रद्द करे.




जिस दिन ये कानून रद्द हुआ उसके कुछ वर्षों पश्चात् भारत दुनिया के सबसे बड़े हथियार निर्यातकों में शामिल होगा. भारतीयों को अगर हथियार निर्माण में छूट मिले तो जितनी हथियार निर्माता कंपनियां पूरी दुनिया में मिलाकर हैं उतनी सिर्फ यूपी-बिहार में होंगी. भारत को कभी भी हथियार के लिए अमेरिका रूस और इजराइल की तरफ नहीं देखना होगा.

भारतीय लोहारों में इतना टैलेंट है कि वो आज भी बिना किसी प्रोफेशनल ट्रेनिंग के कुछ घंटो में पिस्टल और राइफल तैयार कर देते हैं. उदाहरण देखना हो तो खैबर में देखा जा सकता है जहां Traditional Manufacturing Techniques से

पठानी लोहार बड़े-बड़े हथियार तैयार कर देते हैं, खैबर निवासी अपने Indigenous Gunsmith Tradition पर गर्व करते हैं और यहां Indigenous लोग अपनी हथियार निर्माण परंपरा के खिलाफ कानून बनाकर बैठे हैं.

सिर्फ शास्त्र ही हमारी संस्कृति नहीं है, शस्त्र भी हमारी संस्कृति और परंपरा का अहम हिस्सा हैं, असली विजयदशमी तब होगी जब भारत में ब्रिटिशों के Indian Arms Act 1878 जैसे काले कानून रद्द होंगे, जागरूक वकीलों से विनम्र निवेदन है वो इस कानून को कोर्ट में चुनौती दें, जब 377/497 जैसे कानून हट सकते हैं और सबरीमाला की हजारों वर्ष पुरानी परंपराए कोर्ट निरस्त कर सकता है तो इस कानून को निरस्त करना बड़ी बात नहीं है !!

  • कमलेश नाहर





Read Also –

हथियारबंद समाज की स्थापना ही एक आखिरी रास्ता है
बम का दर्शन
भारत की सम्प्रभुता आखिर कहां है ?




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

[ लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहे प्रतिभा एक डायरी को जन-सहयोग की आवश्यकता है. अपने शुभचिंतकों से अनुरोध है कि वे यथासंभव आर्थिक सहयोग हेतु कदम बढ़ायें. ]
Previous Post

अंबानी की मानहानि यानि चोरों की सीनाजोरी

Next Post

“मैं चमारों की गली तक ले चलूंगा आपको”

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

"मैं चमारों की गली तक ले चलूंगा आपको"

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

जनकवि शील – कुछ अप्रासंगिक प्रसंग

October 12, 2020

निजी चिकित्सा प्रणाली के लूट और बदइंतजामी का जीताजागता नमूना पारस एचएमआरआई अस्पताल, पटना

April 16, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.