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मोदी-शाह ने बारुद के ढ़ेर पर बैठा दिया कश्मीर को

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 7, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
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केन्द्र की मोदी-शाह की आपराधिक जोड़ी ने कश्मीर में लागू धारा 370 (जो असलियत में कश्मीर का भारत के साथ विलय का एग्रीमेंट है) को संशोधित किया है. इसी सवाल पर केन्द्रित विभिन्न राजनीतिक विश्लेषकों का यह एक आंकलन है.

पं. किशन गोलछा जैन : जो लोग कश्मीर मुद्दे में पर अफवाहें फैला रहे हैं, वे जान लें कि 370 (1) को संशोधित कर दिया गया है. अतः 35ए की वैल्यू तो अपने आप ही समाप्त हो गयी है क्योंकि 35ए तो 370 का ही हिस्सा था और जब 370 को ही संशोधित कर दिया गया है, तो फिर ये अलग से 35ए का गीत क्यों गाए जा रहे हैंं ?

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एक बात और जो लोग देशभक्ति में ओतप्रोत होकर मोदी जी का बड़ा फैसला इत्यादि-इत्यादि का भ्रम फैला रहे हैं, वो जान ले कि असल में इसे हटाया नहीं जा रहा बल्कि संशोधित किया गया है, वो भी अपने मालिक अम्बानी-अडानी के लिये ताकि वे जम्मू और कश्मीर में जमीनें खरीद सके और वहां अपने प्रोजेक्ट लगा सके. लद्दाख को इसलिये अलग किया गया है क्योंकि वहां पर मेन प्रोजेक्ट हो सकता है और अगर ज्यादा बवाल मचा तो लदाख को अलग बताकर और केंद्रशासित प्रदेश बनाकर शुरू हो सके (वैसे लद्दाख और जम्मू पहले कश्मीर से अलग क्षेत्र ही थे, जिन्हें मिलाकर जम्मू और कश्मीर के नाम से राज्य बनाया गया था). मैं तो मोदीजी से कहता हूंं कि लगे हाथ जम्मू को भी अलग प्रदेश बनाकर उसे भी केंद्रशासित बना दो, ताकि आपके मालिक अम्बानी अडानी वहां पर भी अपना विकास पैदा कर सके !).

जो लोग कश्मीर से सेना बढ़ाये जाने से परेशान हो रहे हैं, उन्हें बता दूं कि कश्मीर में 90 के दशक में 3 लाख से ज्यादा आर्मी तैनात थी और अभी तो सिर्फ दो बार में 35000 ही बढ़ाये गये हैं, जबकि पहले से ही वहां 40 हज़ार से ज्यादा सैनिक तैनात हैं, यानी डबल भी नहीं किया गया है. रही नेताओं को नजरबंद करने और धारा 144 लगाने की बात और सभी दूसरे राज्यों के नागरिकों और अमरनाथ यात्रियों की यात्रा रुकवाकर उन्हें वापिस भेजने की बात तो समझ लीजिये कि ऐसा सिर्फ सावधानी के लिये किया गया है ताकि कोई दंगा या बड़ा बवाल न हो, और ये अलगाववादी नेता सभायें कर लोगों को भड़का न सके !

ये कदम काफी अनुशाषित और प्री-प्लान करके उठाया जा रहा है (नोटबंदी की तरह बेसाख्ता किया गया फैसला नहीं है) और सभी परिस्थितियों का आंकलन कर, उसके अनुरूप व्यवस्था को पहले से तैयार कर लिया गया है (ऐसा इसलिये क्योंकि मोदी जी के मालिक अम्बानी-अडानी अपना नाम इस मुद्दे में सीधे तौर पर सामने नहीं आने देना चाहते होंगे).

हालांंकि इस एक तीर से कई शिकार हो रहे हैं (जैसा कि मैंने पहले भी लिखा). मोदी सरकार जानबूझकर चुप्पी साधे पड़ी है और भक्तों को अफवाहें फैलाने के लिये पहले ही मसाला तैयार करके दे दिया गया था. अतः वे रोज नयी अफवाहों से बाजार को गर्म कर ही रहे हैं. ये जो कश्मीर के नाम पर उछले-उछले से घूम रहे है, उन्हें बाद में समझ में आयेगा कि खोदा पहाड़ और निकली चुहिया, वो भी मरी हुई. इसलिये थोड़ा धैर्य बनाये रखें. कुछ दिनों में सब क्लियर हो जायेगा, तब आपको सब स्पष्ट समझ आ जायेगा !

हांं, ये जानने को मैं भी उत्सुक हूंं कि इस पर मुखौटा कौन-सा लगाया जायेगा (अर्थात सरकार के स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहा हूंं, उसके बाद अपनी व्याख्या और प्रतिक्रिया लिखूंगा).

रवि कौशिक : क्या आप जानते हैं कि धारा 35ए कश्मीर में 1927 मे ही लागू हो गई थी, जिसे तब के महाराजा करण सिंंह ने कश्मीरी लोगों के भविष्य को ये ध्यान में रखते हुए कि बाहर से कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह यहां आकर कश्मीरी लोगों की जमीन आदि को खरीदकर कश्मीरियों की आजीविका के संशाधनों पर कब्जा ना कर ले, जिसको बाद में भारत में विलय होने से पहले समझौते में मान्य किया गया था, तथा इसको धारा 35ए के रूप में जाना जाता है, लेकिन भाजपा सरकार व उसके लोग इसको कांग्रेस की गलती बता झुठा प्रचार करते रहते हैं ताकि देश में नफरत का माहौल बनाया जा सके व बना भी रहे हैं.

मेरा सवाल मोदी व उसकी सरकार से है. कश्मीर वाली धारा 35ए जैसे कानून हिमाचल, उत्तराखंड, मिजोरम, आसाम, नागालैंड, अरुणाचल, मेघालय आदि राज्यों में भी लागू है व इस समय इन राज्यों में बीजेपी की सरकारें है तो जो जोर-आजमाइश व नाटक धारा 35ए को हटाने के लिए ये कश्मीर में कर रहे यही काम अपने द्वारा शासित उन राज्यों में क्यों नहीं कर देते ? वहां सभी भारतीयों को जमीन आदि खरीदने के अधिकार क्यों नहीं दे देते ?

रविन्द्र पटवाल : सीधे तौर पर शेष देश को अंंधा बनाने के लिए कश्मीर को जिबह किया गया है. मुझे याद आता है नोटबंदी के वे दिन, जब जिसे बर्बाद किया जा रहा था, वही सबसे अधिक खुश था. लेकिन अगले दो साल बाद उसे दिक्कत का परेशानी का पता चला. ठीक आज भी वही हो रहा है. देशवासियों को उनके मर्ज का जो इलाज होना था, जिसकी दवा हुक्मरान कर नहीं सकते, उन्हें कश्मीर के बहाने बड़ा काम दिखाया जा रहा है.

हमें देशवासियों से लगातार प्रश्न करना पड़ेगा कि कश्मीर में धारा 370 हटाने से या उन सबको मार देने से तुम्हारी कौन कौन सी समस्या खत्म हो गई ? तुम्हारा बच्चा अब बेहतर स्कुल में जा रहा है ? तुम्हारे रोजगार में बढ़ोत्तरी हो गई ? खेती में दाम मिल गए ? इस सरकार ने पिछले 5 साल और इस बार भी कौन कौन से ऐसे काम किये जो देश को आगे बढाते ? आज तो उल्टा देश जीडीपी में पीछे, नौकरियों के खात्मे, पब्लिक सेक्टर को खत्म करने, रेलवे को खत्म करने जा रही है. तुम्हारी जीवन को नर्क बनाने में कोई कमी नहीं है. और तुम किस बात पर अकड रहे हो ? यही कि जैसे तुम मर रहे थे, बिना अधिकार के तो अब कश्मीर के लोगों को जो विशेष अधिकार मिला था, वह भी खत्म हो गया और तुमसे भी बुरी गत उनकी बनने जा रही है ?

इससे तुम खुश हो ? अपने ही एक दूसरे अंग को काटने से तुम्हें ख़ुशी मिलती है ? अब भारत को एक तरह से मानना पड़ेगा कि पाक अधिकृत कश्मीर पाकिस्तान का है. इससे ख़ुशी मिल रही है ?

नवीन : भारत का कश्मीर के साथ 70 साल पहले जो विवाह हुआ था, उसे मोदी-शाह ने मंगलसूत्र (370) को तोड़कर तलाक दे दिया. संवैधानिक रूप से कश्मीर आजाद हो गया. अब खेल शुरू होगा. घाटी फौज के हवाले. UNO का हस्तक्षेप शुरू होगा. इसी बहाने विश्व के देश इस दोतरफा डिस्प्यूट में कूदेंगे. आज नहीं तो कल कश्मीर को आजाद होने से कोई नही रोक सकता.

जो भौंक रहे हैं कि बहुत अच्छा हुआ, वे अब कश्मीर में घुसकर तो दिखाये. फौज कहां-कहां कितने समय आपको लेकर tour करायेगी. जो काम जिन्ना, लियाकत अली नहीं कर पाये, एक अपराधी न कर दिया. आज अगर कोई खुश होगा तो पाकिस्तान. 370 के खतम होते ही कश्मीर और भारत के सभी संबंध कानूनी रूप से खतम हो गये. शिमला समझौता भी खतम. अब कोई भी आकर पंचायत करेगा.

शायद मूर्खों को पता नही हैं द्वितीय युद्ध के समय अमेरिका ने एक प्रस्ताव पास किया था कि अगर किसी देश में अल्पसंख्यकों द्वारा बहुसंख्यकों पर राज जोर जबरदस्ती से किया जाता है, तो अमेरिका अल्संख्यकों के साथ रहेगा. गांधी ने इसी को आधार बनाकर अंग्रेजों को विश्व के सामने जलील किया था. आज कश्मीर में वही हालात है.

समरथ को नहीं दोष गुसाईं. जनमत संग्रह की भी बात खतम. फौज के बल पर कितने दिन कश्मीर में रहोगे. अपराधी, गुंडे, मवाली के हाथ में लोकतंत्र की कमान होगी तो क्या होगा ? अभी दिल्ली मे रहकर ताली बजाने मे बड़ा मजा आ रहा है. जाओ जमीन खरीदकर कश्मीर मे बसो, तब न पता चलेगा. अरे ये हिजड़े नेता देश को आग में झोंक कर दिल्ली मे बहस कर रहे हैं. कशमीरी पंडितों से पूछ लेना कि वे कैसे कश्मीर छोड़े ? ये हिजड़ी सरकार ने क्या कर लिया ?

देश भूगोल से नही बनता, देश वहां के लोगों से बनता है. कश्मीर के लोगों से आपको जितनी घृणा है, उससे ज्यादा वे लोग आपसे घृणा करते हैं. कल तक कश्मीर भारत का स्वर्ग था, आज भारतीयों के लिये नर्क से भी बदतर होगा. डल झील, निशात बाग, पहलगाम, अमरनाथ की यात्रा के लिये तरस जाओगे. खूबसूरत स्त्री को तलाक दोगे तो बहुत से लोग आश्रय देने के लिये तैयार बैठे होते हैं, वही हाल कश्मीर का है. अमेरिका, चीन निगाह लगाये हैं. उनकी टपकती लार नहीं दिखाई दे रही है, इन फासिस्टों को.

आगे दखते जाईये होता क्या है. अब सिक्किम, गोरखालैंड वाले भी जग जायेंगे. कोई दुस्साहसी अपराधी ही बारूद के ढ़ेर में हाथ डालकर जय श्री राम चिल्लायेगा. आज से कश्मीर का आवागमन स्वयं से बाधित हो जायेगा. देखते हैं कौन बहादुर तिरंगा फहराने लाल चौक जाता है ?

पवन मुख्तार सिंह : सभी संघटक राष्ट्रों की स्वेच्छा के आधार पर अधिकतम संभव बड़े राज्य के गठन की समर्थक है और कश्‍मीर के अलग होने की चाहत नहीं रखती है. लेकिन प्रश्न किसी के चाहने या ना चाहने का नहीं है. यह तय करना कश्मीरियों का हक़ है कि उनकी नियति क्या हो. इसलिए उन्हें आत्मनिर्णय का अधिकार मिलना चाहिए. मनमाने तरीक़े से धारा 370 को ख़त्‍म करके कश्‍मीर की जनता के साथ ऐतिहासिक विश्‍वासघात किया गया है. जम्‍मू-कश्‍मीर के विशेष राज्‍य के दर्जे को ख़त्‍म कर जम्‍मू-कश्‍मीर को दिल्‍ली व पुदुचेरी की तरह अधूरे अधिकारों वाली विधानसभा के साथ और लद्दाख को चण्‍डीगढ़ जैसे विधानसभा रहित केन्‍द्र-शासित प्रदेशों में बदल दिया गया है. इसका अर्थ यह है कि वहाँ पर सीधे केन्‍द्र का शासन होगा, जो आम अवाम के अलगाव को और बढ़ायेगा तथा नाके-नाके पर सेना की तैनाती के ज़ोर पर ही यह शासन चल सकेगा. इतिहास बताता है कि सेना के बूते पर किसी छोटे-से इलाक़े की भी पूरी आबादी को लम्‍बे समय तक दबा-कुचल कर नहीं रखा जा सकता. कश्‍मीर भी इसका अपवाद नहीं होगा.

Read Also –

धारा 370 पर संघी विलाप क्यों ?
हाथ से फिसलता यह मुखौटा लोकतंत्र भी
कश्मीर विवाद का सच

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Comments 2

  1. Rohit Sharma says:
    7 years ago

    पं. किशन गोलछा जैन : मुझे ये समझ नहीं आ रहा सब लोग इसे 370 क्यों लिख रहे है जबकि 370 की मूल धारा में कोई छेड़छाड़ हुई ही नहीं है बल्कि जो संशोधन बिल लाया गया है उसका मूल आधार 370(1) का है !

    Reply
  2. Md khan says:
    7 years ago

    नवीन : भारत का कश्मीर के साथ 70 साल पहले जो विवाह हुआ था, उसे मोदी-शाह ने मंगलसूत्र (370) को तोड़कर तलाक दे दिया.
    तब तो मोदी को 3 साल के लिए जेल में डाल दो।।
    वैसे भी ये साला देश को बेच कर खा गया।
    और इसके भक्त चमचे जो आज आज अंधो की तरह ताली बजाते है। कल वही अपना सर पकड़ कर रोयेंगे।।
    J&k को UN अलग कर ही देगा। तब सब समझ आ जायेगा। जितना मोदी और उसके भक्त उछल रहा है।। सबकी फट जाएगी।।

    Reply

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