Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

Above the Law यानी कानून से ऊपर यानी अब चोर भी Above the Law हो गए !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 26, 2025
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
Above the Law यानी कानून से ऊपर यानी अब चोर भी Above the Law हो गए !
Above the Law यानी कानून से ऊपर यानी अब चोर भी Above the Law हो गए !
Subrato Chatterjeeसुब्रतो चटर्जी

21st century की दुनिया में पूंजीवादी देशों में राजनीतिक जीवन के हरेक स्तर पर यह प्रवृत्ति विकराल रूप धारण करती जा रही है. क्रोनी या गोदी पूंजीवाद के विकास के साथ साथ इसका अन्योन्याश्रय संबंध है.

गोदी पूंजीवाद का मतलब यहां पर उस राजनीतिक, आर्थिक व्यवस्था से है, जिसमें बेईमान धंधेबाज़ों का एक निर्लज्ज और क्रिमिनल गिरोह अपने हितों को साधने के लिए देश के राजनीतिक परिदृश्य से जो सबसे अधिक मूर्ख, व्यभिचारी, भ्रष्ट और आसुरी शक्तियों से लैस है, उसे येन तेन प्रकारेण सत्ता के शीर्ष पर स्थापित कर देना है.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

अब उस व्यक्ति का जीवन और अतीत इतना दाग़दार है कि उसके पास इन धंधेबाज़ों के हाथों ब्लैकमेल होने के अलावा और कोई चारा नहीं बचता है. इस क्रम में जब आप किसी मोदी को अदानी-अंबानी सरीखे बेईमानों की चरण वंदना करते हुए देखते हैं तो आपको तनिक भी हैरानी नहीं होनी चाहिए.

अंतरराष्ट्रीय ताक़तों के एक विशेष समूह के सामने इनके देश हित की क़ीमत पर आत्मसमर्पण भी इसी क्रम में एक कड़ी है, जो एप्सटीन फ़ाइल में मोदी और पुरी के नाम आने से स्पष्ट हो जाता है. स्वाभाविक है कि ऐसे जघन्य, चरित्रहीन क्रिमिनल हमेशा दो कारणों से डरे हुए होते हैं –

पहला कारण खुद की सज़ा को लेकर है. वे जानते हैं कि राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं है. चुनावी लोकतंत्र में तो और भी नहीं. इसलिए इनकी कोशिश चुनाव के ज़रिए सत्ता हथिया कर चुनावी प्रक्रिया को ही पलीता लगाना होता है. इसलिए हिटलर भी चुनाव के ज़रिए ही जीता था और नरेंद्र मोदी भी.

चुनावी प्रक्रिया को हैक करने के लिए सबसे पहले ज़रूरी है चुनाव आयोग पर क़ब्ज़ा करना. इसके लिए कुकुर चंद्रचूड़ ने रास्ता साफ़ कर दिया था और मोदी ने अमित शाह के कुकुर को मुख्य चुनाव आयुक्त बना कर अपना काम आसान कर दिया.

यहीं से शुरू होती है सिस्टम के सबसे ज़्यादा भ्रष्ट व्यक्ति के क़ानून से उपर रखने की परंपरा. सरकार ने कानून बना कर मुख्य चुनाव आयुक्त को आजीवन क़ानूनी कार्रवाई के दायरे से बाहर कर दिया.

संविधान का तथाकथित संरक्षक, यानि सुप्रीम कोठा इस असंवैधानिक क़ानून के ख़िलाफ़ कुछ नहीं किया और अपने फ़ासिस्ट लोगों के कुत्ते होने का फ़र्ज़ अदा किया.

प्रसंगवश, जब क्रिमिनल लोगों की सरकार बनती है तो उसका पहला काम होता है to decriminalise the crime, मतलब हरेक ग़ैरक़ानूनी काम को क़ानूनी घोषित कर देना. इस क्रम में आज बैंक फ्रॉड वगैरह को Insolvency Board and NCLT जैसी संस्थाओं को बना कर क़ानूनी जामा पहनाया गया है.

संदेशा भाइयों के मामले में तो एक कदम आगे बढ़ कर सुप्रीम कोठा ने कल इन पर से क्रिमिनल केस ही हटा दिया अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग कर.

जिस सुप्रीम कोठा ने 2019 से लेकर आज तक हुए देश के हरेक चुनाव में पुख्ता धांधली के सबूतों के वावजूद मोदी सरकार को अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर बर्खास्त नहीं किया, उसने एक चोर को बचाने के लिए उन्हीं का प्रयोग किया. है न मज़ेदार बात ! मतलब अब चोर भी Above the Law हो गए.

जहां तक बात हत्यारों, बलात्कारियों और और देशद्रोहियों को क़ानूनी रिलीफ देने का है तो इसका जीता जागता उदाहरण हम राम रहीम और आसाराम के पैरोल में, गुजरात सरकार के द्वारा बिल्किस बानो के रेपिस्ट लोगों को मुआफ़ी देने के संदर्भ में और हाल में ही यूपी सरकार के द्वारा अख़लाक़ के हत्यारों पर से केस हटाने की पैरवी में देखा जा सकता है.

मतलब क्रिमिनल चाहे कोई भी हो, वो कानून से उपर होना चाहिए, तभी क्रिमिनल लोगों की सरकार के लिए मुफ़ीद इको सिस्टम देश की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था में तैयार होगी.

इसलिए हज़ारों लोगों की मृत्यु के बाद भी कोई रेलमंत्री इस्तीफ़ा नहीं देता है. राजनाथ सिंह सही कहते हैं कि भाजपा सरकार में इस्तीफ़े नहीं होते हैं. सच में आपने कभी किसी क्रिमिनल को इस्तीफ़ा देते हुए देखा है जबकि उसके क्राइम को क़ानूनी वैधता प्रदान करने के लिए संसद और अदालतें मौजूद हैं ?

जहां तक बात नैतिकता और लोकलाज की है तो क्रिमिनल नैतिकता के बोझ तले दबे हुए नहीं होते हैं और नंगों के पास लोक लाज नहीं होता है. यही आज का न्यू नॉर्मल है और यही है नया भारत.

ऐसे में जब मोदी पोस्ट कोलोनियल कल्चर की बात करते हैं तब समझ जाइए कि वे किन आसुरी शक्तियों के नंगे नाच का ज़िक्र कर रहे हैं, जिनके अप्रतिम नायक वो खुद हैं.

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लॉग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लॉग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-pay
Previous Post

हिड़मा एनकाउंटर: सोशल मीडिया पर हमदर्दी की लहर, मीडिया में विवाद और नक्सलवाद के खात्मे का सवाल

Next Post

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की मीडिया से दो-टुक – ‘जनताना सरकार के क्षेत्रों में भूख से कोई भी नहीं मरा है, फिर भी…!’

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की मीडिया से दो-टुक - 'जनताना सरकार के क्षेत्रों में भूख से कोई भी नहीं मरा है, फिर भी...!'

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

लेव तोलस्तोय : रूसी क्रांति के दर्पण के रूप में – व्ला. इ. लेनिन

July 27, 2023

अल्पसंख्यकों के दुश्मन मोदी का एक और कारनामा

December 18, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.