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Above the Law यानी कानून से ऊपर यानी अब चोर भी Above the Law हो गए !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 26, 2025
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Above the Law यानी कानून से ऊपर यानी अब चोर भी Above the Law हो गए !
Above the Law यानी कानून से ऊपर यानी अब चोर भी Above the Law हो गए !
Subrato Chatterjeeसुब्रतो चटर्जी

21st century की दुनिया में पूंजीवादी देशों में राजनीतिक जीवन के हरेक स्तर पर यह प्रवृत्ति विकराल रूप धारण करती जा रही है. क्रोनी या गोदी पूंजीवाद के विकास के साथ साथ इसका अन्योन्याश्रय संबंध है.

गोदी पूंजीवाद का मतलब यहां पर उस राजनीतिक, आर्थिक व्यवस्था से है, जिसमें बेईमान धंधेबाज़ों का एक निर्लज्ज और क्रिमिनल गिरोह अपने हितों को साधने के लिए देश के राजनीतिक परिदृश्य से जो सबसे अधिक मूर्ख, व्यभिचारी, भ्रष्ट और आसुरी शक्तियों से लैस है, उसे येन तेन प्रकारेण सत्ता के शीर्ष पर स्थापित कर देना है.

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अब उस व्यक्ति का जीवन और अतीत इतना दाग़दार है कि उसके पास इन धंधेबाज़ों के हाथों ब्लैकमेल होने के अलावा और कोई चारा नहीं बचता है. इस क्रम में जब आप किसी मोदी को अदानी-अंबानी सरीखे बेईमानों की चरण वंदना करते हुए देखते हैं तो आपको तनिक भी हैरानी नहीं होनी चाहिए.

अंतरराष्ट्रीय ताक़तों के एक विशेष समूह के सामने इनके देश हित की क़ीमत पर आत्मसमर्पण भी इसी क्रम में एक कड़ी है, जो एप्सटीन फ़ाइल में मोदी और पुरी के नाम आने से स्पष्ट हो जाता है. स्वाभाविक है कि ऐसे जघन्य, चरित्रहीन क्रिमिनल हमेशा दो कारणों से डरे हुए होते हैं –

पहला कारण खुद की सज़ा को लेकर है. वे जानते हैं कि राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं है. चुनावी लोकतंत्र में तो और भी नहीं. इसलिए इनकी कोशिश चुनाव के ज़रिए सत्ता हथिया कर चुनावी प्रक्रिया को ही पलीता लगाना होता है. इसलिए हिटलर भी चुनाव के ज़रिए ही जीता था और नरेंद्र मोदी भी.

चुनावी प्रक्रिया को हैक करने के लिए सबसे पहले ज़रूरी है चुनाव आयोग पर क़ब्ज़ा करना. इसके लिए कुकुर चंद्रचूड़ ने रास्ता साफ़ कर दिया था और मोदी ने अमित शाह के कुकुर को मुख्य चुनाव आयुक्त बना कर अपना काम आसान कर दिया.

यहीं से शुरू होती है सिस्टम के सबसे ज़्यादा भ्रष्ट व्यक्ति के क़ानून से उपर रखने की परंपरा. सरकार ने कानून बना कर मुख्य चुनाव आयुक्त को आजीवन क़ानूनी कार्रवाई के दायरे से बाहर कर दिया.

संविधान का तथाकथित संरक्षक, यानि सुप्रीम कोठा इस असंवैधानिक क़ानून के ख़िलाफ़ कुछ नहीं किया और अपने फ़ासिस्ट लोगों के कुत्ते होने का फ़र्ज़ अदा किया.

प्रसंगवश, जब क्रिमिनल लोगों की सरकार बनती है तो उसका पहला काम होता है to decriminalise the crime, मतलब हरेक ग़ैरक़ानूनी काम को क़ानूनी घोषित कर देना. इस क्रम में आज बैंक फ्रॉड वगैरह को Insolvency Board and NCLT जैसी संस्थाओं को बना कर क़ानूनी जामा पहनाया गया है.

संदेशा भाइयों के मामले में तो एक कदम आगे बढ़ कर सुप्रीम कोठा ने कल इन पर से क्रिमिनल केस ही हटा दिया अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग कर.

जिस सुप्रीम कोठा ने 2019 से लेकर आज तक हुए देश के हरेक चुनाव में पुख्ता धांधली के सबूतों के वावजूद मोदी सरकार को अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर बर्खास्त नहीं किया, उसने एक चोर को बचाने के लिए उन्हीं का प्रयोग किया. है न मज़ेदार बात ! मतलब अब चोर भी Above the Law हो गए.

जहां तक बात हत्यारों, बलात्कारियों और और देशद्रोहियों को क़ानूनी रिलीफ देने का है तो इसका जीता जागता उदाहरण हम राम रहीम और आसाराम के पैरोल में, गुजरात सरकार के द्वारा बिल्किस बानो के रेपिस्ट लोगों को मुआफ़ी देने के संदर्भ में और हाल में ही यूपी सरकार के द्वारा अख़लाक़ के हत्यारों पर से केस हटाने की पैरवी में देखा जा सकता है.

मतलब क्रिमिनल चाहे कोई भी हो, वो कानून से उपर होना चाहिए, तभी क्रिमिनल लोगों की सरकार के लिए मुफ़ीद इको सिस्टम देश की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था में तैयार होगी.

इसलिए हज़ारों लोगों की मृत्यु के बाद भी कोई रेलमंत्री इस्तीफ़ा नहीं देता है. राजनाथ सिंह सही कहते हैं कि भाजपा सरकार में इस्तीफ़े नहीं होते हैं. सच में आपने कभी किसी क्रिमिनल को इस्तीफ़ा देते हुए देखा है जबकि उसके क्राइम को क़ानूनी वैधता प्रदान करने के लिए संसद और अदालतें मौजूद हैं ?

जहां तक बात नैतिकता और लोकलाज की है तो क्रिमिनल नैतिकता के बोझ तले दबे हुए नहीं होते हैं और नंगों के पास लोक लाज नहीं होता है. यही आज का न्यू नॉर्मल है और यही है नया भारत.

ऐसे में जब मोदी पोस्ट कोलोनियल कल्चर की बात करते हैं तब समझ जाइए कि वे किन आसुरी शक्तियों के नंगे नाच का ज़िक्र कर रहे हैं, जिनके अप्रतिम नायक वो खुद हैं.

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