लेनिन (1902) : आलोचना की स्वतंत्रता के मायने क्या हैं ?
लेनिन 'आलोचना की स्वतंत्रता' निस्संदेह मौजूदा समय का सबसे फैशनेबल नारा है. यह सभी देशों और समाजवादियों और जनवादियों के...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
लेनिन 'आलोचना की स्वतंत्रता' निस्संदेह मौजूदा समय का सबसे फैशनेबल नारा है. यह सभी देशों और समाजवादियों और जनवादियों के...
स्मार्टसिटी फरीदाबाद : विश्व गुरु के अमृतकाल में भी शौचालय की मांग अपराध है ? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने हर...
आई डोंट वांट पॉलिटिक्स...! ऐसा नहीं है कि इस सरकार के खिलाफ गम्भीर आंदोलन नहीं हुए. बल्कि मुझे लगता है...
राजेन्द्र प्रसाद सिंह ए. सी. दास ने ‘ऋग्वैदिक इंडिया' में लिखा है कि आर्यों का मूल निवास ‘सप्तसिंधु' या ‘पंजाब'...
भारत में बहुत से लोग अभी भी पूछ रहे हैं कि फासीवाद कहां है. उन्हें लगता है कि नाजियों...
ताजमहल : काल के गाल पर रूका हुआ आंसू.... 'काल के गाल पर ठहरा हुआ आंसू...', ताजमहल को देखकर रविन्द्रनाथ टैगोर...
मैं एकाकी खड़ा शरद की शीतलता में, जहां श्याङ नद2 का जल उत्तर ओर बह रहा, नारंगी टापू3 के तट...
मुझे तुम्हारी आंखों में डर देखना अच्छा लगता है मैं जब देखता हूं कि तुम एक बाईस साल की लड़की...
सोशल मीडिया पर इन दिनों 'अमित शाह का राजदार जिसको सुनकर हैरान हो जाएंगे' शीर्षक से एक वीडियो खूब शेयर...
आभा शुक्ला क्या गारंटी है कि जिन 40 को सुरक्षा बलों ने मारा वो उग्रवादी थे...? जब कि खुद सुरक्षा...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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