ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

भारत में जाति की गणना क्यों होनी चाहिए ? ज़मीन के स्वामित्व का भी जाति के अनुसार सर्वे हो

रविश कुमार, अन्तर्राष्ट्रीय पत्रकार भारत की यह सच्चाई है कि यहां जातिवाद है. हर दिन घरों में आदरणीय माता-पिता जाति...

आदिवासी तबाही की ओर

कनक तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ 2011 की जनगणना के मुताबिक आदिवासियों (अनुसूचित जनजातियों) की जनसंख्या 10,42,81, 034 है....

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