ROHIT SHARMA

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'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

देश का साइंटिफिक टेम्पर खत्म कर पाखंडियों ने पीढ़ियों को तबाह कर दिया

लेख को विस्तार देने से पहले विंस्टन चर्चिल को उद्धृत करना चाहूंगा. विंस्टन चर्चिल ने 1946, ब्रिटिश पार्लियामेंट में भारत...

जो जितना भ्रष्ट होता है, वह उतनी ही देर पूजा करता है

कनक तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ छुट्टियां घोषित हर वर्ष होती हैं. फेहरिश्त में संविधान में वर्णित धर्मनिरपेक्षता के...

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