ROHIT SHARMA

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'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

जब सत्ता लोकतंत्र को हांकने लगे तब चौथा स्तंभ ना खोजे

पुण्य प्रसून वाजपेयी राजनीति लोकतंत्र को हांकती है. लोकतंत्र राजनीतिक सत्ता की मंशा मुताबिक परिभाषित होती है. लोकतंत्र की चारों...

बिहार चुनाव ने रोजगार, सरकारी नौकरियों को विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया

हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना बिहार भारत में ही है और अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गलत या...

अर्णब का बचाव करना उनकी तमाम हिंसक और भ्रष्ट हरकतों को सही ठहराना हो जाएगा

रवीश कुमार, मैग्सेसे अवार्ड विजेता अन्तराष्ट्रीय पत्रकार अर्णब गोस्वामी सरकार पर सवाल उठाने वालों को नक्सल से लेकर राष्ट्रविरोधी कहते हैं. भीड़...

चुनावों में क्यों नहीं मुद्दा बन पाता काॅरपोरेट-संचालित उपनिवेशवाद

लोकतन्त्र में चुनावों का स्थान केन्द्रीय महत्त्व का होना चाहिए. उन्हें लोकतन्त्र के महान् पर्व के रूप में देखा जाना...

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