ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

नवदेवियांं या नवअप्सराएंं ..?

कम्बोडिया, वियतनाम, थाईलैंड, सुमात्रा, म्यांमार, लाओस, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बेबीलोन आदि देशों की अप्सराएंं, जिन्हें सामान्य भाषा में नाचने-गाने वाली तवायफें,...

बहसबाजी के अड्डेवाली व्यवस्था को धता बताकर जनता के द्वारा स्थापित विकल्प की ओर क्यों न बढ़ें ?

संजय श्याम साम्राज्यवादी डाकुओं की बढ़ती लूट, देशी सरमायेदारों की फूलती थैलियां, मेहनतकशों की बढ़ती तबाही, बेरोजगारी, आसमान छूती मंहगाई,...

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