पूर्णिया विश्वविद्यालय में प्रोन्नति और वेतन निर्धारण जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलित शिक्षक
हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना यह उदाहरण है बिहार में नव स्थापित एक विश्वविद्यालय का, लेकिन इससे संकेत...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना यह उदाहरण है बिहार में नव स्थापित एक विश्वविद्यालय का, लेकिन इससे संकेत...
कोर्ट की ‘अवमानना’ हो गई है, न्यायाधीश ने यही माना है. ‘अवमानना’ मुख्य न्यायाधीश एस. ए. बोबडे पर की गयी...
रात का तीसरा पहर था. शहर के इस हिस्से में काली रातें भी चमकतीं हैं. नहीं नहीं, रोशनी से नहीं,...
मैं पाकिस्तान में सताया गया हिंदू हूं मैं हिंदुस्तान में दबाया गया मुस्लिम हूं मैं इज़रायल का मारा फ़िलिस्तीनी हूं...
भुखमरी बेरोजगारी हत्याएं बलात्कार मंदी भ्रष्टाचार अशिक्षा कुपोषण बीमारी हमारा आंतरिक मामला है हमें किसी बाहरी हस्तक्षेप की ज़रूरत नहीं...
भारत का वर्तमान तानाशाही निजाम भारत के बहुसंख्यक मेहनतकश अवाम की जिंदगी के सारे रास्ते बंद करने के अपनी फासीवादी...
के. विक्रम राव हिन्दू-मुस्लिम दंगों के लम्बे इतिहास में मुरादाबाद वाला (13 अगस्त, 1980) कई मायनों में सूचक रहा, द्योतक...
हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना अखबारों में छपी खबरों के अनुसार रेलवे ने स्पष्ट किया है कि निजी...
गोलवलकर ऐसे पहले व्यक्ति नहीं थे जिन्होंने हिंदू राष्ट्र या हिंदुत्व की पैरवी की हो लेकिन उनके विचारों में कई...
उतरे हुए चेहरों तुम्हें आज़ादी मुबारक उजड़े हुए लोगों तुम्हें आज़ादी मुबारक सहमी हुई गलियों कोई मेला कोई नारा जकड़े...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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