ROHIT SHARMA

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'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

निजीकृत होती व्यवस्था : गुनाहगार वर्तमान का दागदार भविष्य

हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना कोई उम्मीद भी कैसे करता था कि निजी ट्रेन के टिकटों की कीमत...

क्या मुहम्मद ने इस्लाम प्रचार के लिये किसी अन्य देश पर भी हमला किया था ?

पं. किशन गोलछा जैन, ज्योतिष, वास्तु और तंत्र-मंत्र-यन्त्र विशेषज्ञ एक पूर्व लेख के संदर्भ में एक पाठक का प्रश्न आया...

राष्ट्र और राष्ट्रवाद की अवधारणा चुइंगम है, बस चबाते रहिए

हर व्यवस्था अपने को स्थापित करने, प्रतिष्ठापित करने, स्थायित्व प्राप्त करने और अपना औचित्य सिद्ध करने के लिए अपने समर्थक...

पढ़े-लिखे धार्मिक डरपोक अब पाखंडी लोगों की जमात में बदल रहे हैं

पं. किशन गोलछा जैन, ज्योतिष, वास्तु और तंत्र-मंत्र-यन्त्र विशेषज्ञ तथाकथित धर्मावलंबियों का 'धंधा' आजकल कुछ ज्यादा ही तेजी से फल-फूल...

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