ROHIT SHARMA

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'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

‘अरे’ और ‘रे’ की भाषाई तहजीब से झूठ को सच बना गए प्रधानमंत्री

रविश कुमार, मैग्सेस अवार्ड प्राप्त जनपत्रकार ‘अरे’ से शुरू होकर ‘रे’ पर खत्म हो रहे वाक्यों ने प्रधानमंत्री की भाषा...

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