ROHIT SHARMA

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'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

नक्सलवादी हिंसा की आड़ में आदिवासियों के खिलाफ पुलिसिया हिंसा और बलात्कार का समर्थन नहीं किया जा सकता

बच्चे तक के हाथ की ऊंगलियां काट ली पुलिस ने हिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ता बलात्कारों और हत्या का विरोध करने...

संविधान में आस्था बनाम हिन्दू आस्था की चुनावी जंग

विनय ओसवाल, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकआस्था के भावनात्मक हथियार के बल पर संविधान में आस्था रखने वालों को धूल चटाने के अपने इरादों...

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