ROHIT SHARMA

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'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

राज बादशाह का और हुक्म कम्पनी बहादुर का : सत्ता की पुलिस और पुलिस की सत्ता के बीच गुम लोगों की पुलिस

अंग्रेज अपनी सत्ता के “पाये-पाटी की चूलों” को ठीक से ‘टाईट’ भी नहीं कर पाए थे कि देश में 1857...

भारतीय संविधान किसकी राह का कांंटा है ?

इस देश में गरीबों, वंचितों, शोषितों, पीड़ितों, दबे-कुचले-मसले दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों  के सामाजिक और राजनैतिक अधिकारों का संरक्षक यदि कोई है,...

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