ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

अभिसारिका

अभिसारिका सोचो कि तुम सज धज कर मुझसे मेरे घर मिलने आई हो पहली बार और मैं तुम्हें वहां ब्रुकलिन...

पत्थलगड़ी

पत्थलगड़ी कमलेश बिसराम बेदिया सब जानता है. नदी-नाला, जंगल-पहाड़ और पेड़-पौधे सबके बारे में. आप छोटानागपुर के किसी भी इलाके...

खजाना

खजाना बाबा ने रिमजू के घर चप्पे चप्पे का मौका मुआयना किया. दीवारें कुरेद-कुरेद कर सूंघी, मिटटी को उठाकर उसे...

आखिरी वजूद पर सिमटता यूक्रेन : यूक्रेनी सेना का रूसी क्षेत्र कुर्स्क पर कब्जे का सच और जेलेंस्की का युद्ध बिजनेस

आखिरी वजूद पर सिमटता यूक्रेन : यूक्रेनी सेना का रूसी क्षेत्र कुर्स्क पर कब्जे का सच और जेलेंस्की का युद्ध...

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