ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

ईश्वर

किसी पाश्चात्य दार्शनिक ने कहा था - जो जैसा होता है वैसे ही ईश्वर की कल्पना/निर्माण करता है मुर्ग़ा ईश्वर...

मारे जाएंगे

जो इस पागलपन में शामिल नहीं होंगे, मारे जाएंगे कठघरे में खड़े कर दिये जाएंगे जो विरोध में बोलेंगे जो...

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