आंखें खोलिये, अपने आसपास होने वाले आंदोलनों से जुड़ जाईये
हिमांशु कुमार अगर मोदी सरकार कहीं सबसे ज्यादा अत्याचार कर रही है और सबसे ज्यादा लूट कर रही है तो...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
हिमांशु कुमार अगर मोदी सरकार कहीं सबसे ज्यादा अत्याचार कर रही है और सबसे ज्यादा लूट कर रही है तो...
करंज के पेड़ों से लटके हुए शव हैं या अज्ञातवास में जीते पांडवों के हथियार पौरुष जब परिस्थितियों का स्वैच्छिक...
नागार्जुन के जन्मदिन पर : हरिजन गाथा (एक) ऐसा तो कभी नहीं हुआ था ! महसूस करने लगीं वे एक...
नेशन फर्स्ट, राष्ट्रप्रेम, राष्ट्र के लिए बलिदान आदि शब्दों पर फिसलता हुआ देश गैंगस्टर कैपिटलिज्म में जा गिरा हेमन्त कुमार...
स्वामी सहजानंद सरस्वती की आत्मकथा 'मेरा जीवन संघर्ष' उनके जीवनकाल में क्यों प्रकाशित न हो सका ? कैलाश चंद्र झा,...
अदिति... धीरे धीरे मेरी बांई आंख की रोशनी जा रही है मेरी वामा अब दक्षिणावर्त है सूर्य के उत्तरायण होने...
पेपर लीक मामले की पड़ताल : बाजार में खड़ा प्रतियोगिता परीक्षा और उसका रिजल्ट लोकसभा में जैसे-तैसे सरकार बनाने वाली...
आपातकाल बनाम आपातकाल का जश्न सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग समेत देश की तमाम ऐजेंसियों का बेजा इस्तेमाल करने और...
मयंक सक्सेना : जिंदगी लंबी नहीं, भरपूर होनी चाहिए बाबू मोशाय ! मयंक सक्सेना को मैं नहीं जानता था और...
हत्यारे के ख़ून से सने हाथों में आप मसले हुए गुलाब की लाली भी देख सकते हैं ज़मीन पर पड़े...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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