Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home लघुकथा

बंदूक

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 2, 2020
in लघुकथा
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

एक सरपंच अपने गांंव में राहत कोष के पैसे से लाइसेंसी बन्दूक लेकर आया. पूरे गांंव में मुनादी हुई कि सरपंच साहब ऑटोमेटिक बन्दूक लेकर आए हैं. कुछ मुनादी करने वालों ने बन्दूक की तारीफ़ करने में इतनी छूट ले ली कि चार दिन बाद चौपालों की चर्चाओं में बन्दूक, तोप बन चुकी थी.

इस बीच लोग भूल गए कि गांंव में अकाल पड़ा है. नहर का काम एक साल से अटका है. गांंव का अस्पताल बंद हैं. भुखमरी और बीमारियों ने सर उठा रखा है. कुछ दिनों पहले पड़ोसी गांंव के दबंगों ने ज़मीन के विवाद में गांंव के चार जवानों को मार डाला था और सरपंच ने उनका नाम तक नहीं लिया था.

You might also like

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

एन्काउंटर

पूरे गांंव में अभी बन्दूक की चर्चा उफ़ान पर थी. सरपंच और उसके चमचों का कहना था कि गांंव में बन्दूक आते ही, आसपास के गांंव में उसकी शान बढ़ेगी. भूखे सोते हुए बच्चों को उनकी मांं जादुई बन्दूक की कहानी सुनाती कि कैसे ये बन्दूक एक दिन भूख को भी मार गिराएगी.

कुछ गांंववाले इस निर्णय से नाराज़ थे. उनका कहना था कि अस्पताल बंद है, नहर नहीं बन रही है, तो बन्दूक खरीदने से क्या फ़ायदा होगा ? फिर बन्दूक की कीमत भी बहुत ज़्यादा है और सरपंच उसका बिल भी नहीं दिखा रहा है. लेकिन गांंववालों ने इन लोगों को चुप करा दिया.

गांंववालों को तो ये लग रहा था कि कम से कम अब पड़ोस के गांंववालों की दबंगई तो कम हो जाएगी. कुछ ही दिनों में दशहरा आने वाला था. दशहरे के दिन आसपास के बीस-पच्चीस गांंव देवी के मंदिर जाते थे और शस्त्र पूजा करते थे. गांंववालों को लगा कि इस बार तो पूजा में हमारी ही धाक होगी.

दशहरा आया और गांंववाले सरपंच के साथ मंदिर जाने की प्रतीक्षा करने लगे. सरपंच के चमचों ने कहा कि आज उनकी तबियत ठीक नहीं है. गांंववालों ने कहा कि आज तो मंदिर जाकर अपना शक्ति प्रदर्शन करना बहुत ज़रूरी है. बहुत ज़ोर देने पर सरपंच किसी तरह मंदिर जाने के लिए तैयार हुआ.

कुछ लोगों को छोड़कर लगभग सारा गांंव ढोल-नगाड़े के साथ मंदिर पहुंंचा और वहांं पहुंंचते ही उनके होश उड़ गए. ऑटोमेटिक बन्दूक केवल उनके पास नहीं थी, दूसरों के भी पास थी और वो भी एक नहीं, किसी के पास दो, तो किसी के पास पांंच. दबंगों के गांंव के पास तो वैसी ही 10-15 बंदूकें थी.

फिर एक गांंववाले ने हिम्मत कर के, दूसरे गांंववाले को कोने में ले जाकर बन्दूक की कीमत पूछी. उसकी असली कीमत जानकर उसके गुस्से का ठिकाना नहीं था. बन्दूक की कीमत बढ़ा-चढ़ाकर सरपंच ने उन्हें लूट लिया था. जब तक गांंववाले कुछ समझते सरपंच गाड़ी लेकर अपने घर जा चुका था.

रात को गांंववालों ने सरपंच का घर घेर लिया और उसे बाहर आने को कहा. उसके चमचे उसका बचाव करते रहे लेकिन गांंववाले नहीं माने. फिर कुछ देर बाद सरपंच बाहर आया, अपनी बन्दूक के साथ. उसने हवा में कुछ फ़ायर किए और मुस्कुरा दिया. गांंववाले अब जाकर समझे कि गांंव में बन्दूक किसलिए आयी थी ?

  • सुधांशु कुमार

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

तुम्हारा डर, हमारी जीत

Next Post

सेना, पुलिस के बल पर आम जनता को कुचलने की निःशब्द और क्रूर कोशिश का नाम है – कोरोना महामारी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

लघुकथा

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

by ROHIT SHARMA
March 17, 2026
लघुकथा

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

by ROHIT SHARMA
March 11, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

by ROHIT SHARMA
February 7, 2026
Next Post

सेना, पुलिस के बल पर आम जनता को कुचलने की निःशब्द और क्रूर कोशिश का नाम है - कोरोना महामारी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

पुलवामा कॉन्सपिरेसी पर सतपाल मलिक के खुलासा से क्या बदलेगा ?

April 20, 2023

आउशवित्ज – एक प्रेम कथा : युद्ध, स्त्री और प्रेम का त्रिकोण

June 6, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.