पुस्तक / फिल्म समीक्षा

मौमिता आलम के ठंडे उत्तरों के पीछे खौलते सवालों की कविता

मौमिता आलम के ठंडे उत्तरों के पीछे खौलते सवालों की कविता । मूल्य 250/रूपये, प्रकाशन: न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन, अनुवाद: अमिता...

Read moreDetails

‘पेदरो परामो’ बनाम पेदरो परामो यानी जादू बनाम यथार्थ

‘पेदरो परामो’ बनाम पेदरो परामो यानी जादू बनाम यथार्थ मनीष आजाद 1955 में प्रकाशित, ‘उआन रुल्फो’ (Juan Rulfo) के मशहूर...

Read moreDetails

आउट ऑफ दिस अर्थ : खनन कम्पनियों व पूंजीवाद के काम करने के तरीकों और जनप्रतिरोध की तीखी पड़ताल

आउट ऑफ दिस अर्थ : खनन कम्पनियों व पूंजीवाद के काम करने के तरीकों और जनप्रतिरोध की तीखी पड़ताल मनीष...

Read moreDetails

नवनीत पांडेय : ‘भले ही हम थोड़े हैं पर हथौड़े हैं’

नवनीत पांडेय : 'भले ही हम थोड़े हैं पर हथौड़े हैं' इन्दरा राठौड़ यदि पाने की महत्वाकांक्षा से आप मुक्त...

Read moreDetails

क्रांतिकारी कवि वरवर राव की नजरबंदी त्रासदपूर्ण अन्याय रही !

क्रांतिकारी कवि वरवर राव की नजरबंदी त्रासदपूर्ण अन्याय रही ! इंदरा राठौड़ सत्ता की कान में आसानी से कोई जूं...

Read moreDetails

‘संकोफ़ा’ : क्योंकि इतिहास कभी अलविदा नहीं कहता…

'संकोफ़ा' : क्योंकि इतिहास कभी अलविदा नहीं कहता... मनीष आजाद ‘ओपन वेन्‍स ऑफ लैटिन अमरीका’ जैसी चर्चित पुस्‍तक के लेखक...

Read moreDetails
Page 1 of 6 1 2 6