रविश कुमार, मैग्सेसे अवार्ड प्राप्त जन पत्रकार पत्रकारिता बिनाका गीतमाला नहीं है. फ़रमाइश की चिट्ठी लिख दी और गीत बज...
Read moreDetailsहेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना लगातार 15 वर्षों तक राज करने के बाद भी अगर नीतीश कुमार को...
Read moreDetailsभारत के शासकों की विस्तारवादी और पड़ोसी राष्ट्रों के साथ दबंगई भरी नीतियों के कारण आज भारत तमाम पड़ोसी देशों...
Read moreDetailsरविश कुमार, मैग्सेसे अवार्ड प्राप्त जन पत्रकार जर्मनी ने बेरोज़गार होने से बचा लिया, अमरीका ने बेरोज़गार होने दिया, भारत...
Read moreDetailsयह घटना 2006 या 2007 की है. ओडिशा के ढेंकनाल ज़िले के एक सुदूर गांंव में थे. बड़ी मुश्किल से...
Read moreDetailsवैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं. हर बार का निष्कर्ष पहले से अधिक भयानक और विध्वंसकारी हैं. लेकिन फिर भी जलवायु...
Read moreDetailsमनमीत, सब-एडिटर, अमर उजाला अगर हिमालय न होता तो भारत कैसा होता ? जवाब सीधा है कि उत्तराखंड, हिमाचल, कश्मीर...
Read moreDetailsउद्योगपतियों से कॉन्फ्रेंस में उद्योगपतियों के चाचा आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के पुरे भाषण का सार इतना ही था...
Read moreDetailsहेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना अचानक से यह शब्द बहुत अधिक चर्चा में आ गया है. गम्भीर शिक्षार्थियों...
Read moreDetailsमनमीत, सब-एडिटर, अमर उजाला क्या हिमालय कभी सच में एक विशाल समुद्र था ? क्या टेक्टोनिक प्लेट्स के आपसी टकराव...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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