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अमिताभ कांत जैसे लोगों की वैचारिक असलियत का पर्दाफाश होना चाहिए

हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना जब कोविड-19 के त्रासदी काल को प्राइवेट अस्पतालों ने मुनाफाखोरी और लूट के...

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मनरेगा क्यों जरूरी है और मोदी सरकार लाख कोशिशों के बावजूद इसे क्यों खत्म नहीं कर पायी ?

इसमें कोई संदेह नहीं है कि केन्द्र की मोदी सरकार अंधों और अनपढ़ों की सरकार है. यह जिस चीज का...

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गिरीश कर्नाड : अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रहरी

गिरीश कर्नाड की मौत को एक वर्ष बीत चुके हैं. गिरीश कर्नाड नाटककार, अभिनेता, निर्देशक, फिल्मकार होने से भी बढ़कर...

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ब्रिटिश साम्राज्यवाद ही क्यों, कभी सोचा है ?

ब्रिटिश साम्राज्यवाद ही क्यों, कभी सोचा है ? इकॉनमिक्स. इंटरनेशनल ट्रेड को इंटरकॉन्टिनेंटल बनाने वाले, सबसे पहले समुद्र पर अपनी...

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पत्रकारिता के सिस्टम को राजनीतिक और आर्थिक कारणों से कुचल दिया गया

रविश कुमार, मैग्सेसे अवार्ड प्राप्त जन पत्रकार पत्रकारिता बिनाका गीतमाला नहीं है. फ़रमाइश की चिट्ठी लिख दी और गीत बज...

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बिहार विधानसभा चुनाव : जंगल राज की परिभाषा को संकीर्ण नहीं बनाया जा सकता

हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना लगातार 15 वर्षों तक राज करने के बाद भी अगर नीतीश कुमार को...

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रोज़गार के प्रश्न को भारत के बेरोज़गार युवाओं ने ही ख़त्म कर दिया

रविश कुमार, मैग्सेसे अवार्ड प्राप्त जन पत्रकार जर्मनी ने बेरोज़गार होने से बचा लिया, अमरीका ने बेरोज़गार होने दिया, भारत...

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