जेएनयू मामले में आम चुनाव से तीन महीने पहले ही चार्जशीट क्यों ? रविश कुमार का आलेख. जवाहर लाल यूनिवर्सिटी...
Read moreDetailsअपवाद किसी देश, समाज या ढांचे का चरित्र निर्धारित नहीं करते हैं. चरित्र मेजारिटी तय करती है. अपवाद संख्या में...
Read moreDetailsसंविधान के अनुच्छेद 16(4) के अनुसार, आरक्षण किसी समूह को दिया जाता है और किसी व्यक्ति को नहीं. सुप्रीम कोर्ट...
Read moreDetailsदेशी धनकुबेर ही नहीं विदेशी धनकुबेरों के हित का उतना ही और पूरा अधिकार होता है, जितना देशी धन कुबेरों...
Read moreDetailsहमारी लड़ाई ब्राह्मण जाति या किसी अन्य जाति, धर्म व पंथ से नहीं है. हमारी लड़ाई तो ब्राह्मणवाद अर्थात...
Read moreDetailsजो ब्राह्मण अपने आप को आर्य कहते थे, उन्हीं ब्राह्मणों ने 1922 में हिन्दू महासभा की स्थापना की और 1925...
Read moreDetailsजब नकदी का चलन ही नहीं रह जायेगा, तब सरकारों को नोट छापने, सिक्के ढालने और उनके वितरण की आवश्यकता...
Read moreDetailsआज बजरंग दल, शिवसेना, विश्व हिन्दु परिषद में ओबीसी, दलित और आदिवासी बड़ी तादात में मिलेंगे. संघ द्वारा एक तरफ...
Read moreDetailsए.एन. समाज अध्ययन संस्थान के निदेशक और समाजशास्त्री डॉ. डी.एम. दिवाकर का मानना है कि बिहार में वामपंथी अपने एजेंडे...
Read moreDetailsदेश के सरकारी बैंकों का एनपीए तेजी से बढ़कर 10 लाख करोड़ के पार जाने वाला है, इस एनपीए...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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