Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

किसानों की कर्जमाफी पर शोर मचाने वाले कॉरपोरेट घरानों के कर्जमाफी पर क्यों नहीं शोर मचाते ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 30, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

किसानों की कर्जमाफी पर शोर मचाने वाले कॉरपोरेट घरानों के कर्जमाफी पर क्यों नहीं शोर मचाते ?

 

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

देश के सरकारी बैंकों का एनपीए तेजी से बढ़कर 10 लाख करोड़ के पार जाने वाला है, इस एनपीए में भी कृषि क्षेत्र का हिस्सा सिर्फ 8% है बाकि हिस्सा कॉरपोरेट सेक्टर का ही है. कॉरपोरेट के लोन कब राइट ऑफ हो जाते हैं, टैक्स में कब छूट मिल जाती है, देश के अधिकतर जनता को इसके बारे में जानकारी भी नहीं मिलती है लेकिन किसानों की कर्ज माफी ढोल पीटकर की जाती है.

किसानों की कर्ज माफी की खबर जैसे ही आती है, हायतौबा मचना शुरू हो जाता है. किसी भी राज्य में किसानों की कर्ज माफी से पहले खूब डंका पीटा जाता है. इसके बाद एक बहुत बड़ा तबका ये कहना शुरू करता है कि ये मुफ्तखोरी है, अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ेगा, राजकोषीय घाटा बढ़ जाएगा. इसके उलट जब कॉरपोरेट के लोन बट्टे खाते में डाले जाते हैं, टैक्स में छूट दी जाती है तब इसे देश के आर्थिक विकास के लिए शुभ माना जाता है.

अगर आंकड़ों पर गौर करें तो जितना किसानों के लोन पिछले दस सालों में विभिन्न राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के द्वारा माफ हुए हैं उससे अधिक लोन कॉरपोरेट के तीन सालों में राइट ऑफ कर दिए गए हैं. आरबीआई के मुताबिक अलग-अलग राज्य सरकारों ने पिछले दस सालों में किसानों के 2.21 लाख करोड़ के लोन माफ किये हैं, वहीं कॉरपोरेट सेक्टर के तीन साल में 2.4 लाख करोड़ के लोन राइट ऑफ कर दिए गए हैं. अप्रैल 2018 में केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया कि आरबीआई के डाटा के मुताबिक पब्लिक सेक्टर के बैंकों ने 2,41,911 करोड़ रुपये का कॉरपोरेट सेक्टर वाले बैड लोन ‘राइट-ऑफ’ कर दिए हैं. यह प्रक्रिया 2014-15 से लेकर 2017 के बीच पूरी की गई.




इसके अलावा कॉरपोरेट सेक्टर को टैक्स में भी भारी छूट दी गई है. संसद में दिए गए एक जवाब के मुताबिक, अकेले 2015-16 में ही 6.11 लाख करोड़ की टैक्स छूट दी गई. 2004 से 2015-16 के बीच के 12 बरसों के समयकाल में उद्योग क्षेत्र को दी गई कुल टैक्स राहत 50 लाख करोड़ के बराबर थी. साल 2012-13 में कॉरपोरेट जगत को करों में 68,720.0 करोड़ रुपये की छूट मिली जबकि साल 2016-17 में कॉरपोरेट जगत को करों में 86,144.82 करोड़ रुपये की छूट हासिल हुई और वित्तवर्ष 2017-18 में 85,026.11 करोड़ रुपये की.

देश के सरकारी बैंकों का एनपीए तेजी से बढ़कर 10 लाख करोड़ के पार जाने वाला है, इस एनपीए में भी कृषि क्षेत्र का हिस्सा सिर्फ 8% है बाकि हिस्सा कॉरपोरेट सेक्टर का ही है. कॉरपोरेट के लोन कब राइट ऑफ हो जाते हैं, टैक्स में कब छूट मिल जाती है, देश के अधिकतर जनता को इसके बारे में जानकारी भी नहीं मिलती है लेकिन किसानों की कर्ज माफी ढोल पीटकर की जाती है. ये सच है कर्जमाफी किसानों के समस्या का अंत नहीं है. कर्जमाफी कर किसानों का हमदर्द दिखने की कोशिश करने वाली सरकार किसानों को बाद में भूल जाती है.




अगर सरकार चाहती है कि किसानों का कर्ज माफी करने की नौबत न आये तो सबसे पहले सरकार को किसानों के लिए अपनी ठोस नीति बनानी होगी.फसल उत्पादन की लागत बिना सब्सिडी दिए किसानों को कम लगे, इस दिशा में कार्य करने की जरूरत है. दूसरा किसानों को फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले, ये सुनिश्चित करने की जरूरत है. सरकार एमएसपी तय तो कर देती है लेकिन किसानों को इसका लाभ नहीं मिलता है. एक आंकड़े के मुताबिक सिर्फ 10 प्रतिशत किसान ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपना फसल बेच पाते हैं. प्राकृतिक आपदा के बाद किसानों के फसल क्षति के सही आकलन की भी जरूरत है ताकि किसानों को उचित मुआवजा मिल सके !

कॉरपोरेट को छूट देना अगर जरूरी है तो किसानों को सहयोग देना भी बेहद जरूरी है. सरकार ऐसी नीति बनाये कि कॉरपोरेट और किसान एक दूसरे के विपरीत नहीं बल्कि एक दूसरे के पूरक दिखे. यही देश के आर्थिक उन्नति और रोजगार का माध्यम बनेगी.

(आंकड़े विभिन्न मीडिया रिपोर्टों से जुटाए गए हैं )

– अभिषेक कुमार चौधरी




Read Also –
बदहाल उत्तर भारतीय
फर्जी सरकार के फर्जी आंकड़े
70 साल के इतिहास में पहली बार झूठा और मक्कार प्रधानमंत्री
भारतीय किसानों का घोषणा पत्र



[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

रिज़र्व बैंक और सरकार का टकराव और अर्थव्यवस्था की बिगड़ती हालत

Next Post

आखिर कोई धन्नासेठ कैसे बन जाता है ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

आखिर कोई धन्नासेठ कैसे बन जाता है ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

भाजपा की जीत के मायने : एक जातिगत विश्लेषण

March 10, 2022

इतिहास तो आगे ही बढ़ता है…

January 5, 2026

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.