Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

भारत में हिन्दु राष्ट्र की धोखाधड़ी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 3, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारत में हिन्दु राष्ट्र की धोखाधड़ी

आज बजरंग दल, शिवसेना, विश्व हिन्दु परिषद में ओबीसी, दलित और आदिवासी बड़ी तादात में मिलेंगे. संघ द्वारा एक तरफ तो इन ओबीसी, दलित, आदिवासियों का इस्तेमाल मुसलमानों और इसाइयों पर हमलों में किया गया. दूसरी तरफ इससे भाजपा को सत्ता में आने में इन वर्गों ने महत्वपूर्ण भूमिका निबाही क्योंकि संघ के मालिकान सवर्ण भारत की आबादी में अल्पसंख्यक हैं लेकिन अपनी चालाकी से यह सवर्ण अमीर कम संख्या में होते हुए भी हिन्दु राष्ट्र का धोखा खड़ा कर के सत्ता पर काबिज़ है.

एक युवक से फोन पर बातचीत हुई. वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे. बहुत लम्बी बातचीत में उनकी कई शंकाओं का समाधान हुआ. मैंने उन्हें संघ के सांस्कृतिक पुनरूत्थान के षडयंत्र के बारे में समझाया. संघ कहता है कि हमें भारत का स्वर्ण युग वापिस लाना है लेकिन भारत मैं कोई स्वर्ण युग था ही नहीं.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

भारत के अतीत में दास प्रथा है.
भारत के अतीत में जात पात है.
भारत के अतीत में औरतों की गुलामों जैसी हालत है.

भारत के अतीत की झलक देखनी है तो आज के भारत से पीछे को देखना शुरू कीजिये.




संघ अतीत की महानता की काल्पनिक कहानियां आपकी दिमागों में भरता है. अतीत के गौरवशाली वीर देवता जिन राक्षसों को मार रहे थे, वे भारत के दलित और आदिवासी थे. ऋषि-मुनि राजाओं के चापलूस पुरोहित थे. राजा असल में व्यापारियों, महाजनों और भूमिवानों की रक्षा करता था. मेहनत करने वाले नीच जात घोषित कर दिये गये. किसान, कारीगर, मज़दूर नीच जात और गरीब बना दिये गये थे. सारी सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक ताकत राजा, सैन्य अधिकारी, महाजन, भूमिवान और पुरोहितों के पास आ गयी थी.

आज़ादी के बाद सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक समानता लाना तय हुआ था लेकिन आज़ादी की लड़ाई से घबरा कर पुराने शासक वर्ग में घबराहट थी.  उसी पुराने शासक वर्ग ने अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिये संघ का गठन किया. ध्यान दीजिये संघ में सवर्ण, धनी लोगों का वर्चस्व है.

संघ के लोग आज़ादी की लड़ाई में भगत सिंह, अम्बेडकर, नेहरू और गांधी का विरोध करते रहे. संघ के लोग हमेशा अंग्रेजों की चापलूसी करते रहे और बराबरी की बात करते वालों पर हमले करते रहे. आज़ादी मिलते ही संघ ने गांधी की हत्या कर दी. अम्बेडकर पर राजनैतिक प्रहार किये. संघ ने समानता की घोषणा करने वाले संविधान को कभी स्वीकार नहीं किया.




संघ में शामिल बड़ी जातियों के अमीर, सवर्ण, भूमिपति गिरोह ने मिलकर भारत की राजनीति की दिशा को भटका दिया. इन्होंने कहा भारत की समस्या सामाजिक राजनैतिक या आर्थिक गैर बराबरी नहीं है बल्कि भारत की समस्या मुसलमान, ईसाई और साम्यवादी है और इसका हल यह है कि भारत में हम हिन्दु गौरव की स्थापना करें और भारत को हिन्दु राष्ट्र बनायें.

हिन्दु राष्ट्र बनाने की मुहिम को भड़काने के लिये आज़ादी मिलते ही बाबरी मस्जिद में राम की मूर्ति रखी गई. मन्दिर निर्माण को हिन्दु गौरव की पुर्नस्थापना का प्रतीक बना दिया गया. संघ द्वारा हिन्दु राष्ट्र बनाने की मुहिम में ओबीसी, दलित और आदिवासियों को एक रणनीति के तहत जोड़ा गया.




आज बजरंग दल, शिवसेना, विश्व हिन्दु परिषद में ओबीसी, दलित और आदिवासी बड़ी तादात में मिलेंगे. संघ द्वारा एक तरफ तो इन ओबीसी, दलित, आदिवासियों का इस्तेमाल मुसलमानों और इसाइयों पर हमलों में किया गया. दूसरी तरफ इससे भाजपा को सत्ता में आने में इन वर्गों ने महत्वपूर्ण भूमिका निबाही क्योंकि संघ के मालिकान सवर्ण भारत की आबादी में अल्पसंख्यक हैं लेकिन अपनी चालाकी से यह सवर्ण अमीर कम संख्या में होते हुए भी हिन्दु राष्ट्र का धोखा खड़ा कर के सत्ता पर काबिज़ है.

संघ के झ्स हिन्दुत्व के धोखे से सबसे बड़ा नुकसान भारतीय समाज को यह हुआ कि भारत के दलित, ओबीसी और आदिवासी बराबरी के लिये संघर्ष करने की बजाय संघ की वानर सेना बन कर रह गये इसलिये संघ का स्वर्ण युग की वापसी का नारा दरअसल सवर्ण अमीरों का वर्चस्व बनाये रखने का षडयंत्र है. हम इसलिये संघ का विरोध करते हैं.

  • हिमांशु कुमार





Read Also –

1857 के विद्रोह को प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम कहने का क्या अर्थ है ?
मनुस्मृति : मनुवादी व्यवस्था यानी गुलामी का घृणित संविधान (धर्मग्रंथ)
भारत का गौरवशाली इतिहास !?
माया से बाहर निकलो और धर्म के लिए वोट करो क्योंकि हिन्दुराज में हिंदुत्व ही खतरे में है … !
भीमा कोरेगांवः ब्राह्मणीय हिन्दुत्व मराठा जातिवादी भेदभाव व उत्पीड़न के प्रतिरोध का प्रतीक
रामराज्य : गुलामी और दासता का पर्याय




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

बिहार में वामपंथियों के गढ़ एक-एक कर क्यों ढ़हता चला गया ?

Next Post

जीएसटी बिल बनी गले की हड्डी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

जीएसटी बिल बनी गले की हड्डी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

साम्राज्यवादी युद्ध का विरोध करें !

March 3, 2022

ग्लोबल गांधी फिल्मों का विषय तो हो सकता है, उनका मोहताज कभी नहीं

November 1, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.