श् श् श् अभी अभी एक मौत हुई है इस कमरे में हम ढूंढ रहे हैं उंगलियों के निशान मृतक...
Read moreDetailsआज़ाद देशों की समस्या गरीबी नहीं होती है भूखमरी नहीं होती है बेरोजगारी नहीं होती है यह तो गुलाम देशों...
Read moreDetailsहल्कू भैया! अब हो कैसे ? मुन्नी कैसी ? जबरा कैसा ? और खेत पर पहरा कैसा ? हल्कू भैया!...
Read moreDetailsअल्बर्ट पिंटो बोलता है तो खूब बोलता है झूठ सच जो बोलना हो बेधड़क बोलता है झूठ तो कुछ इस...
Read moreDetailsबिन पायल भी तुम्हारे पैर कितने सुघड़ लग रहे हैं इन पैरों में थोड़ी-थोड़ी धूल लगी हुई है धूल से...
Read moreDetailsवो डरता है बंदूकधारी सुरक्षाकर्मियों के घेरों के बावजूद वो डरता है मज़बूत किले में हिफाज़त के बावजूद वो डरता...
Read moreDetails...क्योंकि तुम अपने दुःख के कतरे से भी महाकाव्य रच देते हो तुम्हारा जीवन कहानियों में पुनर्जन्म पाता है तुम्हारी...
Read moreDetailsउम्मीदें जंग खाई कच्चे लोहे के बनी कीलों जैसी थीं समुद्र की नमकीन हवाओं से खोखले हुए दीवारों पर टंगी...
Read moreDetailsदुबले पतले सीधे-साधे हमेशा करते क्रान्ति की बातें ये बच्चे मुझे लगते हैं सबसे प्यारे इन बच्चों को साथ चलते...
Read moreDetailsयुद्ध भूमि में फूलों की एक बेतरतीब क्यारी हरे भरे घास भींगी, भीनी मिट्टी और इनके बीच औंधे मुंह गिरा...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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