आजकल मैं जिन्दा लोगों से ज्यादा मरे हुए लोगों से बात करता हूं क्योंकि ज्यादातर जिन्दा लोग तो उनसे भी...
Read moreDetailsचौपाया बनने के दिन हैं पूंछ उठा कर मादा गिनने के दिन गए अच्छा है कि मादा के अपमान से...
Read moreDetailsबच्चे फिलिस्तीन के हो या बस्तर के... बच्चे फिलिस्तीन के हो या बस्तर के लूटेरे इन पर भी रहम नही...
Read moreDetailsमेरे फिलिस्तीन बच्चे ! मेरे फिलिस्तीन बच्चे ! जब तुम जवां होगे दुनिया भर के समाजशास्त्री, इतिहासकार, राजनीतिज्ञ, पत्रकार बहस...
Read moreDetailsवो तानाशाह है वो बच्चों के काले लिबास से डर जाता है वो तानाशाह है खुद की परछाईं से डर...
Read moreDetailsतुम इतने बच्चों को मार कैसे सकते हो ? अभी तो उन्होंने नदियों, पहाड़ों और पेड़ों में रंग भरना सीखा...
Read moreDetailsलाल जूते वो बच्चे जिन्होंने अभी नहीं सीखा था पांव में जूते पहनना युद्ध की विभीषिका के बीच वो बच्चे...
Read moreDetailsफिलीस्तीनी जख्मों के नाम... वो दौर भी हम से पूछेगा वो सदा भी हमसे पूछेगी जब उजड़ रहा था चमन...
Read moreDetailsहम जिन्होंने युद्ध नहीं किया तुम्हारे शरीफ़ बेटे नहीं हैं ज़िंदगी ! वैसे हम हमेशा शरीफ़ बनना चाहते रहे हमने...
Read moreDetailsमुक्ति-योद्धाओं के लिए... जब तक मेरी एक बालिश्त ज़मीन भी शेष है एक जैतून का पेड़ है मेरे पास एक...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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