डराते हो गिरफ्तारियों से...? डराते हो गिरफ्तारियों से डराते हो जेलों से डराते हो यातनाओं, बंदूकों और हत्याओं से तुम...
Read moreDetailsतुम्हारे जश्न ने निगल ली है मेरी आज की दिहाड़ी मज़दूर हूं साहब जब जब भी तुम्हारी ख़ुशी देख कर...
Read moreDetailsमैं एक मुस्लिम औरत हूं और मैं बिक्री के लिए नहीं हूं मैंने आजादी की लड़ाई के लिए अपना जीवन...
Read moreDetailsविश्व आदिवासी दिवस पर दुनिया भर के आदिवासियों को समर्पित कविता हमारा खून हमेशा बहता रहा है हम लिखते रहे...
Read moreDetailsमन्दिर से पहले मस्जिद थी मस्जिद से पहले मन्दिर था उस मन्दिर से पहले क्या था ? एक खेत था...
Read moreDetailsआखिर राज्य में कितनी चीटियां है ... ? राजा को वरदान है उसे कोई मार नहीं सकता. लेकिन साथ ही...
Read moreDetailsरोम जल रहा है मुरलीधरन मुरली बजा रहा है पानी कैसे लाता ताप कैसे महसूसता पानी लाता ताप महसूसता...
Read moreDetailsएक तस्वीर अटक गई है हटती ही नहीं, चिपक गई है आंखों के कॉर्निया और रेटिना पर लटकी हुई है...
Read moreDetailsवह औरत पर्स से खुदरा नोट निकालकर कंडक्टर से अपने घर जाने का टिकट ले रही है उसके साथ अभी...
Read moreDetailsजब हिन्दू राष्ट्र के फासिल्स तलाशे जाएंगे कल को जब हिन्दू राष्ट्र के फासिल्स तलाशे जाएंगे तो भावी इतिहासकार हैरान...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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