इसी तरह बीच बीच में तुम मुझे याद आती रही जब वे मेरी पीठ से सटी चादर को जबरन खींच...
Read moreDetailsमैं निर्विघ्न खाना खा रहा हूं तो यह यूं ही नहीं है यह एक ऐतिहासिक बात है ऐसा न हो...
Read moreDetailsहे लेखक ! हे लेखक ! तुम्हारे लिए वह क्षण कितना सुकून भरा होता होगा न जब तुम अपनी किसी...
Read moreDetailsअटो रेने कस्तिय्यो एक दिन मेरे देश के राजनीति-निरपेक्ष बुद्धिजीवियों से पूछेंगे ज़रूर हमारे ये सीधे-सादे लोग. उनसे पूछा जायेगा...
Read moreDetailsवो बच्चों के काले लिबास से डर जाता है वो तानाशाह है खुद की परछाई से डर जाता है खरीदता...
Read moreDetailsमैंने आपको जाने तो नहीं कहा... मैंने आपको जाने तो नहीं कहा था बस इतना भर कहा कि आप मेरे...
Read moreDetailsदेखो-देखो नशे में धुत्त हत्यारा आदिवासी युवक पर मूत रहा है... (कार्टून : हेमन्त मालवीय) देखो-देखो नशे में धुत्त एक...
Read moreDetailsएक बार एक देश था उसमें एक फासिस्ट था वह भाषण में शब्दों से खेलता था कविताएं भी लिखता था...
Read moreDetailsउन्हें कभी नहीं सताता पराजय का बोध वे हमेशा विजेताओं की जय बोलते हैं अखंड होता है उनका विश्वास कि...
Read moreDetailsशंबूक का कटा सिर जब भी मैंने किसी घने वृक्ष की छांव में बैठकर घड़ी भर सुस्ता लेना चाहा मेरे...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.