बात इक्कीसवीं सदी की पहली दहाई के शुरूआती दिनों की है जब बर्बरता और पागलपन का एक नया अध्याय शुरू...
Read moreDetailsराजा को वरदान है उसे कोई मार नहीं सकता. लेकिन साथ ही एक चेतावनी भी है, उसे छोटे छोटे घावों...
Read moreDetailsमेरे जुराबों के नीचे कई छेद हैं
Read moreDetailsकोई कितना ही बड़ा धार्मिक क्यों न होकोई कितना ही बड़ा नमाजी क्यों न होबड़े से बड़े पादरी को ही...
Read moreDetailsभगवान को तलाशा जा रहा है मंदिर-मस्जिदों मजारों, पीरों, कब्रों और टीलों की जड़ों में खोदी जा रही हैं जड़ें...
Read moreDetailsडेविड के सवालों का जवाब दो स्पार्टाकस स्पार्टकस के शहीद होने के बाद जब लटकाया जा रहा था लैम्पपोस्टों पर...
Read moreDetailsहमको नन्दू राष्ट्र बनाना है... डूबता होगा गर पश्चिम में हमको तो दक्षिण में डुबाना है सबबिधान को बदलो हमको...
Read moreDetailsसिर पर बैठ गए धर्म-ग्रन्थ छाती पर बैठ गया ईश्वर आंखों पर बैठ गए धर्म-गुरु पैरों को बांध लिया परंपराओं...
Read moreDetailsकठिनाइयों से रीता जीवन मेरे लिए नहीं नहीं, मेरे तूफानी मन को यह नहीं स्वीकार मुझे तो चाहिए एक महान...
Read moreDetailsजब पुरुष ने स्त्री को देखा 1 पुरुष ने देखा वह स्त्री से कमतर था पुरुष जब श्रेष्ठ होने को...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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