लाशों के भी नाखून बढ़ते हैं अगर अंतिम क्रिया को तुमने दो चार दिन टाल दिया या, अगर किसी वजह...
Read moreDetailsहमने तो दीर्घायु होने का आशीर्वाद दिया था हमें क्या पता था तुम फांसी लगा लोगे नाम भगत का लेने...
Read moreDetailsमैं चाहता हूं मेरा शहर छोटा रहे दिन भर काम और रात भर सोता रहे सुबह सुबह लोग एक दूसरे...
Read moreDetailsमैं इस तीसरी दुनिया का हर वह चौथा आदमी हूं जिसके पास किराए का मकान भी नहीं है लेकिन मताधिकार...
Read moreDetailsमर चुका आदमी इतना अच्छा लगता है जितना अच्छा वह कभी जीते जी नहीं लगा था मन होता है कि...
Read moreDetailsवो रात भर अपनी नयी प्रेमिका को अपनी पुरानी प्रेम कविताएं सुनाता रहा ! जैसे किसी के पुराने लिबास किसी...
Read moreDetailsसेलफ़ोन आप अपने सेलफ़ोन पर बात करते हैं करते रहते हैं, करते जाते हैं और हंसते हैं अपने सेलफ़ोन पर...
Read moreDetailsदेशद्रोही मैं देशद्रोही हूं क्योंकि मैंने अंधेरों को उजाला नहीं अंधेरा कहा, मैं देशद्रोही हूं क्योंकि मैं एक आतंकवादी को...
Read moreDetailsकैसा लगता है घर से दूर अंजाने में अंजाने शत्रुओं के बीच की गोलाबारी में मारा जाना निर्दोष होना बचे...
Read moreDetailsअगर मेरे पास रिवाल्वर होता तो क्या होता ? पुलिस की लाश होती और मैं आजाद होता…
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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