पत्रकारों की भीषण बाढ़ है फूली फूली पत्रकारों की क्षत विक्षत सड़ी गली लाशें महक रहीं हैं इधर उधर महामारी...
Read moreDetails'हम हार क्यों गए स्पार्टाकस ?' पूछा था बुढ़िया ने, मरते हुए स्पार्टाकस से. 'हम तो लड़े थे, कमजोरों के...
Read moreDetailsदोस्तों वह तुष्टिकरण की नीति से तुम्हें धीरे धीरे मार रहा है तुम्हें इस तरह तिल तिल मार कर अपार...
Read moreDetailsघर में कांटेदार पेड़ लगाने की मनाही है बावजूद इसके अंदर एक नागफणी सजा रखा है इस रिश्ते को क्या...
Read moreDetailsजब नफरत है तो नफरत बरकरार रखना तकलीफ सूख चुकी है किनारा मिले न मिले किनारों से किनारा कर लिया...
Read moreDetailsएक-साथ सब मुर्दे बोले ‘सबकुछ चंगा-चंगा’, सा’ब, तुम्हारे रामराज में शववाहिनी गंगा. ख़तम हुए श्मशान तुम्हारे, ख़तम काष्ठ की...
Read moreDetailsखंडहरों के बीच इंसान को नष्ट किया जा सकता है पराजित नहीं सबसे कम हेमिंगवे कुछ खंडहर पर्यटकों का आकर्षण...
Read moreDetailsप्रियजनों को सी-ऑफ करना महंगा हो गया है एपी एक्सप्रेस का प्लेटफार्म नंबर आठ पर लगने की सूचना है यह...
Read moreDetailsझूठ इतना विस्तारित है कि ढ़कने की चादर छोटी पड़ रही है ईत्र का छिड़काव बेअसर है दुर्गंध कुछ ऐसी...
Read moreDetailsयह जंगल क्षेत्र है खूंखार जानवरों से इलाका अटा पड़ा है सम्हल कर रहना है संसद का दरवाजा अंदर ठीक...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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