कोरोना है तो है आप पहले चुनाव प्रचार कर लिजिए कोरोना है तो है कुर्सी किसी हाल हासिल होनी है...
Read moreDetailsजब तुम्हें होना है... हमारे इस ऊर्जस्वी, सम्भावनासम्पन्न, लेकिन अंधेरे, अभागे देश में, एक योद्धा शिल्पी की तरह..! और रोशनी...
Read moreDetailsजब हम कहते हैं घर में ही रहें तो मान कर चलते हैं कि इस दुनिया में सबके पास और...
Read moreDetailsमुझे मालूम है तुम मेरे दुश्मन नहीं हो मेरी तरह फटेहाल हुक्म के गुलाम हो मैं अपने लिए लड़ता हूं...
Read moreDetailsतुम इस बाग की खूबसूरत फूल हो जिस पर तितलियां और भौंरे अक्सर मंडराते रहते हैं इनकी शराफत काबिले तारीफ...
Read moreDetailsकिताब जो पढ़ी जानी थी पढ़ी नहीं गई किताब पढ़ते उसे फांसी मिली किताब का वह पन्ना अब तक मुड़ा...
Read moreDetailsऐसी क्या जल्दी है खेत हरा भरा रहे नलकूपों में पानी की जगह खून नहीं पानी बहता रहे ट्रैक्टर खेत...
Read moreDetailsजर्मनी में,जब फासिस्ट मजबूत हो रहे थे..और यहां तक किमजदूर भी बड़ी तादाद में,उनके साथ जा रहे थे..हमने सोचा...हमारे संघर्ष...
Read moreDetailsजिस गेहूं के आटे की रोटी आप खाते हैं, उसे कौन पैदा करता है ? जो दाल, सब्जी, दूध व...
Read moreDetailsएक दिन मेरे मुल्क के तटस्थ बुद्धिजीवियों को कटघरे में खड़ा कर सवाल करेंगे हमारे सार्वधिक साधारण जन. उनसे पूछा...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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