उधर से इधर कोई नहीं आया इधर से उधर कोई नहीं गया हम वहीं हैं जहां कल थे वो वहीं...
Read moreDetailsकिशोरी तुम्हारी गाल पर उगे मुंंहासे नव ग्रह हैं या अंधकार की असीम कोख में पलते सितारे तुम्हें कभी नहीं...
Read moreDetailsआवारा लड़के आवारा लड़कियों के पीछा करते हैं आवारा लड़के लड़कियां नामुराद होकर दफ़्तरों के चक्कर लगाते हैं नौकरी की...
Read moreDetailsहवा में किस बदन की बदबू कितनी घुली है सब सूंघने में लगे हैं कल तक कबीले को सरदार मिल...
Read moreDetailsजश्न ए चिराग जब सूरज डूब जाएगा और चांद जब कहीं नहीं होगा आसपास तुम्हें पूरी छूट होगी जश्न ए...
Read moreDetailsकविता के लिए यह कठिन समय है जो समय आदमी के लिए जितना कठिन होगा वह समय कविता के लिए...
Read moreDetailsउधर से इधर कोई नहीं आया इधर से उधर कोई नहीं गया हम वहीं हैं जहां कल थे वो वहीं...
Read moreDetailsमंदिर इस मंदिर में अब कोई मोनालिसा नहीं रहती बेघर हुए लोग सांध्य बाती के लिए ढूंंढ लेते हैं सड़क...
Read moreDetailsजो बेचा, जानता है क्या बेचा जो खरीदा, जानता है क्या खरीदा बात जब राष्ट्र की हो तो बेहतर है...
Read moreDetailsएक लड़की आती है और मेरे कंधे लग कर रोती है मेरा कोई नहीं रहा न बाप न भाई न...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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