क्या आपको पता है..? कि वो आपके खिलाफ, मनमाने फैसले क्यों ले रहे हैं..? क्या आपको पता है..? आपके धरनों,...
Read moreDetailsमरो मत मारो तुम्हारा मरना कोई ख़बर नहीं है अब क्योंकि वे तुम्हें पहले से ही मान चुके हैं मरा...
Read moreDetailsवोह नफ़रत के जो बीज बोए थे तुमने, फ़सल आज तैयार पक के खड़ी है. चलो बांट लो कुछ बचा...
Read moreDetailsआप पूछते हैं- हाथरस का दरिन्दा कौन है ? और सोच रहे हैं कि बलात्कारी मिल जाये तो सर फोड़...
Read moreDetailsमैं ता उम्र पानी के घर में रहा यहांं सांंसें लेने के लिए जद्दोजहद नहीं करनी पड़ी मैं डूबूरी था...
Read moreDetailsरोज़ एक ख़ास वक्त पर एक ख़ास तल्ले पर रुकती है लिफ्ट गलियारे के शीशे की खिड़की से झांकता है...
Read moreDetailsमालिक लोग आते हैं, जाते हैं कभी तिरंगा, कभी भगवा कुर्ता पहनकर, कभी सफेद, कभी हरा, कभी नीला तो कभी...
Read moreDetailsविकास का आकाश इतना संकीर्ण ! सोचा नहीं था देशभक्ति का रंग इतना दागदार ! सोचा नहीं था पता तो...
Read moreDetailsमां बेटे की सरकार गई मोदी जी आए हैं कतारबद्ध खड़े रहो सब के लिए रोटी लाए हैं लोगों जरा...
Read moreDetailsयह ऐरा-गैरा 83 वर्षीय बूढ़ा नहीं है मेरी देशभक्त सरकार का कहना है यह भीमा-कोरेगांव का साजिशकर्ता है यह दलितों...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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